मजदूरों, छोटे कामगारों को मिलेगी यूनिक आईडी, सरकार ने शुरू की तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत में लोकसभा चुनाव को लेकर हलचल मची हुई है। ऐसे में अब भारत में बहुत जल्द एक और बड़ा सरकारी कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। देश के लगभग 45 लाख लोगों को आधार की ही तरह एक नया यूनिक नंबर दिया जाएगा। आइए आपको बताते हैं कि ये यूनिक नंबर किन लोगों को मिलेगा और इससे लाभ क्या होगा।
उच्च न्यायालय ने इस कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी श्रम मंत्रालय को दी है। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद जैसे ही नई सरकार का गठन हो जाएगा, वैसे ही यह काम देशव्यापी स्तर पर आरंभ हो जाएगा।
इन लोगों को मिलेगा ये यूनिक नंबर
ये यूनिक नंबर आधार की ही तरह होगा, जो देश के असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को मिलेगा। बता दें कि असंगठित क्षेत्रों को सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना का कोई लाभ नहीं मिलता है। श्रम मंत्रालय की मानें तो फिलहाल देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या 45 करोड़ है।
ऐसे होगा असंगठित क्षेत्र के लोगों का पंजीयन
कुछ समय पूर्व ही उच्च न्यायालय ने श्रम मंत्रालय को असंगठित क्षेत्र के कामगारों के पंजीयन करने का निर्देश दिया था। श्रम मंत्रालय इस पंजीयन के लिए एक ऐप बनाएगा, जहां से असंगठित क्षेत्र के लोग खुद को पंजीकृत कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी असंगठित क्षेत्र के लोग खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। खास बात ये है कि इसके लिए उन्हें बहुत कम शुल्क देना होगा।
लोगों को मिलेगा ये लाभ
इस संदर्भ में कॉमन सर्विस सेंटर के सीईओ डी.सी. त्यागी ने बताया कि यह काम अगले महीने से शुरू हो जाएगा और रजिस्टर्ड होने वाले कामगारों को 'यूविन' नामक यूनिक नंबर दिया जाएगा। बता दें कि इस नंबर से ही उनकी पहचान होगी और उन्हें सरकारी स्कीम का लाभ मिल सकेगा।
ये यूनिक नंबर मिलने के बाद असंगठित क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा होगा। वे पेंशन से लेकर स्वास्थ्य सेवा जैसी स्कीम का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि 45 करोड़ लोगों को पंजीकृत करने का काम कोई छोटा काम नहीं है।
श्रम मंत्रालय ने की पूरी तैयारी
श्रम मंत्रालय ने रजिस्ट्रेशन की पूरी तैयारी कर ली है और ये काम करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। मंत्रालय नई सरकार के गठन के तुरंत बाद ही यह काम आरंभ कर देगा। हालांकि सिर्फ राज्य सरकारों ने ही असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पंजीकृत करने का काम शुरू किया है। राष्ट्रीय स्तर पर अब तक ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया है।