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राहत पैकेज के रूप में मिल सकता है टैक्स छूट का तोहफा
Wed, 26 May 2021 06:08 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 26 May 2021 06:08 AM IST
सार
वित्त मंत्रालय छोटी मझोली कंपनियों के साथ पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को राहत दे सकता है, इसके लिए महामारी के असर का आकलन किया जा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से प्रभावित क्षेत्रों को सरकार फिर राहत पैकेज देने की तैयारी में है। इस बार टैक्स छूट के रूप में यह सौगात मिल सकती है।
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सूत्रों के मुताबिक, 2020 में महामारी की शुरुआत के बाद से ही पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के अलावा विमानन पर भी महामारी की मार पड़ी है। एमएसएमई क्षेत्र सबसे ज्यादा रोजगार देता है। अभी 6.5 करोड़ एमएसएमई अर्थव्यवस्था में 30% का योगदान देती हैं।
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ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता का कहना है कि सरकार के पास नकद राहत देने के लिए पूंजी नहीं है। आरबीआई से 99,122 करोड़ का लाभांश मिला , लेकिन राहत पैकेज के रूप में अभी सिर्फ टैक्स छूट ही दी जा सकती है। इसके अलावा कर्ज पर गारंटी और खपत बढ़ाना भी एक विकल्प बन सकता है।
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1.3% रह सकती है मार्च तिमाही की विकास दर : एसबीआई
महामारी से प्रभावित 2020-21 की आखिरी तिमाही (जनवरी मार्च) की विकास दर 1.3% रह सकती है । एसबीआई रिसर्च ने इकोरैप रिपोर्ट में बताया है कि बीते पूरे वित्तवर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3% की गिरावट आ सकती है। राष्ट्रिय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) 31 मई को जीडीपी के आंकड़े जारी करेगा।
एनएसओ ने चौथी तिमाही की विकास दर भी नकारात्मक (-) 1% रहने 31 मई को सरकार का अनुमान लगाया था। एसबीआई जारी करेगी आंकड़े ने न सिर्फ तिमाही विकास दर में तेजी का दावा किया है , बल्कि 2020-21 के पूर्व में लगाए अनुमान (-) 7.4% में भी सुधार किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की 25 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 5 वां सबसे तेजी से विकास करने वाला देश है । दूसरी लहर से पहली तिमाही में 6 लाख करोड़ के नुकसान का अनुमान है , जो पिछले साल 11 लाख करोड़ रुपये था।
बार्कलेज ने 1.5% घटाया विकास दर अनुमान
ब्रिटेन की वित्तीय फर्म बार्कलेज ने 2021-22 के लिए भारत के विकास दर अनुमान में 1.5% कटौती करते हुए 7.7% रहने का दावा किया है। पहले 9.2% रहने का अनुमान लगाया था। फर्म ने कहा, अगर देश में कोरोना की तीसरी लहर आती है तो 3.3 लाख करोड़ का और नुकसान हो सकता है। मौजूदा लॉकडाउन से मई में हर हफ्ते 60 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। अप्रैल के दो सप्ताह में 40 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था।