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Govt Housing Quota: दिव्यांगों के लिए सरकारी आवास आवंटन में चार फीसदी आरक्षण अनिवार्य, केंद्र ने किया एलान
Thu, 22 May 2025 09:31 PM IST
निर्मल कांत
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 22 May 2025 09:31 PM IST
सार
Govt Housing Quota: दिव्यांगों के लिए सरकारी आवास आवंटन में चार फीसदी आरक्षण अनिवार्य, केंद्र ने किया एलान
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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
केंद्र सरकार ने दिव्यांगों को बड़ी राहत देते हुए सरकारी आवास आवंटन में चार फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। आवास एवंस शहरी विकास मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि सुगम्य भारत अभियान के तहत सभी नागरिकों के लिए समान अवसरों को सुनिश्चित करने के मकसद से यह निर्णय लिया गया है।
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विज्ञप्ति में कहा गया, दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के तहत संपदा निदेशालय ने दिव्यांगों के लिए केंद्र सरकार के आवासों तक उचित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया है। मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल प्रत्येक नागरिक के सशक्तिकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है और एक समावेशशी व सुलभ भारत की नींव को मजबूत करती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया आदेश में कहा है कि ईकेवाईसी (डिजिटल केवाईसी) प्रक्रिया दिव्यांगों के लिए सुलभ होनी चाहिए। जस्टिस जे.बी.पारदीवाला और जस्टिस आर.महादेवन की बेंच ने एसिड हमलों के पीड़ितों और दृष्टिबाधित लोगों को ईकेवाई प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल पहुंच का अधिकार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
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इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को निर्देश दिया गया है कि वह ऐसे दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे ईकेवाईसी प्रक्रिया में ग्राहक की पहचान जांचने के लिए आंख झपकाने जैसी विधियों के अलावा अन्य विकल्प सुलभ हों।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई यह स्पष्ट करे कि वीडियो आधारित केवाईसी (वी-सीआईपी) में ग्राहक को जोड़ने के लिए आंख झपकाना अनिवार्य नहीं है, ताकि यह प्रक्रिया और अधिक समावेशी बन सके। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि केवीआई फॉर्म और ग्राहक पंजीकरण फॉर्म को इस तरह से फिर से डिजाइन किया जाए कि उनमें दिव्यांगता का प्रकार और प्रतिशत दर्ज किया जा सके, जिससे बैंक और अन्य संस्थान दिव्यांग ग्राहकों को उचित सुविधाएं दे सकें।