फेल नहीं हुई ‘उदय’, बजट में आ सकती है नई योजना: आरके सिंह
- नई योजना में होंगी उदय, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति और एकीकृत विद्युत विकास योजना तीनों की खूबियां
- 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लक्ष्य पूरा करना होगा आसान
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सरकार इस हफ्ते पेश होने जा रहे आम बजट, 2020-21 में उदय योजना के उन्नत संस्करण का एलान कर सकती है। इससे गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य आसान हो सकता है। केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने सोमवार को यह जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बिजली वितरण कंपनियों के पुनरुद्धार और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनी इस योजना के फेल नहीं होने पर भी जोर दिया।
सिंह ने एनएसई पर पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) के 75 करोड़ डॉलर के अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड की सूचीबद्धता के अवसर पर कहा, ‘हमने एक नई (उदय) योजना के लिए कहा है। हमने वित्त मंत्रालय के साथ परामर्श किया था। मुझे उम्मीद है कि नई योजना को बजट में जगह मिलेगी।’
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा, अगर बजट में योजना को जगह मिलती है तो यह अच्छा होगा क्योंकि इससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वितरण कंपनियों की जरूरतों का समाधान निकाला जाएगा। सरकार ने कर्ज में डूबी बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन और वित्तीय क्षमताओं में सुधार के उद्देश्य से नवंबर, 2015 में उज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) पेश की थी।
एक ही योजना पर होगा सरकार का जोर
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि कई योजनाएं लागू करने की पिछली परंपरा की तुलना में केंद्र सरकार एक ही योजना पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी और राज्यों को हर तरह के फायदे लेने के लिए वितरण कंपनियों के घाटों में कमी लानी होगी। केंद्र सरकार उदय योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) और एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) की विशेषताओं को एक ही कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रही है।
घाटे में कमी होगा नई योजना का लक्ष्य
इसका ब्योरा देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार घाटे में कमी के लिए सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा, ‘यह सहायता घाटे में कमी के लिए तकनीक और आधुनिक उपकरण के रूप में दी जाएगी।’ हालांकि इस योजना में पुरानी सभी योजनाओं की खूबियां शामिल होंगी। उन्होंने कहा, ‘अब बिजली मंत्रआलय के लिए सिर्फ एक योजना होगी।’
घाटा कम होने पर ही जारी होगा कोष
उन्होंने यह भी कहा, योजना में शर्त है कि वितरण कंपनियों को घाटे में कमी पर जोर देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजना के अंतर्गत इस दिशा में काम होने पर ही कोष जारी किया जाएगा। वितरण कंपनियों का घाटा 15 फीसदी कम करने के लक्ष्य के मद्देनजर उन्होंने कहा कि बिजली की बिक्री वित्तीय आधार को ध्यान में रखते हुए ही की जाएगी और राज्यों को अपनी सब्सिडी का फैसला करना होगा।
सूक्ष्म वित्त संस्थानों को मिले ज्यादा कोष
सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) ने सरकार से सिडबी और नाबार्ड जैसे विकास वित्त संस्थानों (डीएफआई) से ज्यादा वित्त उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे वे गरीब लोगों को कम ब्याज पर ज्यादा पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। एमएफआई के संगठन सा-धन के कार्यकारी निदेशक पी सतीश ने कहा, उद्योग ने बैंकिंग करस्पॉन्डेंट्स (बीसी) द्वारा दिए जा रहे कर्ज पर जीएसटी भी वापस लेने की मांग की है, जो बैंकों की तरफ से सूक्ष्म-ऋणदाताओं द्वारा दिए जाते हैं। देश में सक्रिय लगभग 200 एमएफआई कर्ज वितरण के लिए बैंकों के बीसी के रूप में काम करते हैं, जिसके लिए लाभार्थियों को दिए जाने वाले कुल कर्ज पर लगभग 18 फीसदी जीएसटी लगता है।