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काम की बात: दिवाली पर तोहफे में मिला सोना तो लगेगा टैक्स, जानें क्या है आयकर कानून

Mon, 08 Nov 2021 06:17 AM IST
देव कश्यप कालीचरण, नई दिल्ली।
कालीचरण, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 08 Nov 2021 06:17 AM IST
सार

आयकर कानून के तहत सोने से हुई कमाई पर करदाताओं को करना होता है कर भुगतान।

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Gold received as a gift on Diwali tax will applicable know what is the income tax law
सोना (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

विस्तार

आपको दिवाली पर तोहफे के रूप में सोना मिला है और आप उसे बेचकर मुनाफा कमाते हैं तो टैक्स का भुगतान करना होगा। इन पर टैक्स सोने के उत्पादों के आधार पर लगता है। इसके लिए इन्हें दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहली श्रेणी में सोने की जूलरी, सिक्के और ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) को शामिल कर सकते हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) और गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट (जीडीसी) आते हैं। आयकर विशेषज्ञों का कहना है कि आप सोने को बेचकर मुनाफा लेते हैं तो उस पर शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के हिसाब से टैक्स लगेगा। यह सोना कितने दिन अपने पास रखकर बेचते हैं, उसी हिसाब से टैक्स भी देना होगा।

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जूलरी पर टैक्स नहीं
अगर आपको तोहफे के रूप में सोने की जूलरी मिली है तो उसे निवेश की श्रेणी में नहीं रखा जाता। लेकिन, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ईटीएफ के साथ यह छूट नहीं मिलती। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये सभी उत्पाद निवेश की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में आपको टैक्स देनदारी का पूरा ध्यान रखना होगा। गोल्ड ईटीएफ में भी शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। टैक्स कितना देना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि गोल्ड ईटीएफ को कितने दिन बाद बेचा जा रहा है।
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गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट और बॉन्ड
गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट (जीडीसी) आयकर कानून के तहत पूंजीगत संपत्ति नहीं है। इसलिए इस कोई टैक्स नहीं लगता है। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) में निवेश पर सरकार हर साल 2.50 फीसदी निश्चित ब्याज देती है, जिसे करदाता की अन्य स्रोत से कमाई में जोड़ा जाता है। इसमें आठ साल की मैच्योरिटी अवधि के बाद होने वाले लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, समय से पहले निकासी पर बॉन्ड के रिटर्न पर अलग-अलग टैक्स की दर लागू है। आमतौर पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का लॉकइन पीरियड 5 साल है। इसके या मैच्योरिटी अवधि पूरा होने से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से मिलने वाला रिटर्न लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स की श्रेणी में आता है। इसके तहत 20 फीसदी टैक्स और 4 फीसदी सेस प्लस सरचार्ज लगता है।
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गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड ईटीएफ को 36 महीने नहीं हुए हैं और आप उसे बेच रहे हैं तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स में आता है और इस पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। गोल्ड ईटीएफ को अगर आप 36 महीने बाद बेच रहे हैं तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के हिसाब से टैक्स लगता है। इसकी बिक्री से होने वाले लाभ पर 20 फीसदी टैक्स लगता है।

गोल्ड म्यूचुअल फंड
गोल्ड म्यूचुअल फंड पर 20% टैक्स और 4% सेस देना पड़ता है। यह नियम लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के लिए है। अगर गोल्ड म्यूचुअल फंड को 36 महीने के अंदर बेचते हैं तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स में आएगा। इसमें सीधे तौर पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसे अन्य स्रोत से कमाई मानकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।


तोहफा 50,000 रुपये से कम तो टैक्स में छूट
टैक्स एवं निवेश सलाहकार बलवंत जैन का कहना है कि दिवाली पर तोहफे में मिले सोने की कीमत 50,000 रुपये से कम है तो टैक्स नहीं लगेगा। यह तोहफा परिवार या रिश्तेदार ने दिया है तो भी आपको टैक्स नहीं देना होगा। 

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