जीडीपी की आंकड़ेबाजीः कांग्रेस को जेटली का जवाब, सीएसओ एक विश्वसनीय संस्थान
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नए जीडीपी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर कांग्रेस के सवाल उठाने के जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय एक विश्वसनीय संस्थान है और यह वित्त मंत्रालय से एक निश्चित दूरी बनाकर रखता है।
जेटली ने कहा कि फरवरी 2015 में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने नए फॉर्मूले पर काम करना शुरू किया था, जिसमें आधार साल (बेस ईयर) 2011-12 रखा गया था और इसे जारी कर दिया गया था। यह नई सीरिज काफी अच्छे से तुलना करती है और अर्थव्यवस्था को सही मायने में दर्शाती है।
Finance Minister Arun Jaitley: In Feb 2015, the CSO worked on a new formula with 2011-12 as the base year & a new GDP series was announced. This new series is globally more comparable, takes into account greater representation & is more reflective of the state of the economy. pic.twitter.com/aJxYSWcImL
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 29, 2018
Finance Minister Arun Jaitley: Now in continuation of same exercise, applying same yardstick, new series has been made applicable from 2004-5. So growth on the basis of new series maybe revised upwards or downwards depending on applicability of the data, the formula is the same.
— ANI (@ANI) November 29, 2018
जारी हुआ था जीडीपी का नया डाटा
नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और सांख्यिकी मंत्रालय सेक्रेटरी प्रवीण श्रीवास्तव ने केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से तैयार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का बैक सीरीज डाटा जारी किया। उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा क्षेत्र शामिल किए गए हैं, ताकि जीडीपी की गणना ठीक से हो।
पहले था 2004-05 आधार वर्ष
सरकार ने 2004-05 के बदले जीडीपी का साल बदलकर 2011-2012 किया है। बता दें कि जनवरी, 2015 में सरकार ने राष्ट्रीय खातों के लिए 2004-05 के बजाय 2011-12 को आधार वर्ष घोषित किया था। इससे पहले 2010 में यूपीए सरकार ने आधार वर्ष को बदला था।
राजीव कुमार ने कहा कि इस आंकड़े में ताजा सर्वेक्षण और जनगणना के डाटा को शामिल किया गया है। इसके अलावा नई सीरीज के रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़े भी जोड़े गए हैं। इसमें स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड कंपनी, सेबी, पीएफआरडीए और आईआरडीए को भी शामिल किया गया है। कुमार के मुताबिक, 2004-05 और 2011-12 के बेस ईयर बदलने पर एक कमेटी ने जीडीपी में 3 लाख करोड़ का अंतर बताया था।
उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों को पेश करने के पीछे सरकार की कोई गलत मंशा नहीं है। श्रीवास्तव ने भी कहा कि पुरानी और नई सीरीज के आंकड़ों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। नई गणना पद्धति को शीर्ष सांख्यिकीविदों ने परखा है।
एनडीए शासन में सुधरी दिखी है विकास दर
श्रीवास्तव के मुताबिक, वर्ष 2011-12 सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष-2013 के लिए जीडीपी 5.5 फीसदी, वित्त वर्ष-2014 के लिए 6.4 फीसदी है। नई सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष-2015 के लिए जीडीपी 7.4 फीसदी, वित्त वर्ष 2016 के लिए 8.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2017 के लिए 7.1 फीसदी है। बता दें कि वित्त वर्ष 2015 से अब तक देश में वर्तमान एनडीए सरकार का शासन रहा है।
अगस्त वाली रिपोर्ट का असर तो नहीं
अगस्त 2018 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की तरफ से बैक सीरीज डाटा के आकलन के लिए एक समिति का गठन किया गया था। इस कमेटी की तरफ से जारी रिपोर्ट के ड्राफ्ट में वर्तमान सरकार के चार सालों के मुकाबले यूपीए के 2004-05 से 2013-14 तक के शासनकाल में अर्थव्यवस्था का विकास ज्यादा तेजी से होने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2006-07 के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जीडीपी दर 10.08 फीसदी पर पहुंच जाने की बात कही गई थी, जो वर्ष 1991 में देश में उदारीकरण की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा विकास दर थी।
बता दें कि आजादी के बाद देश की सबसे ऊंची 10.2 फीसदी की विकास दर वित्त वर्ष 1988-89 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासनकाल में आंकी गई थी। हालांकि कमेटी की यह रिपोर्ट गणना में त्रुटि की बात कहकर खारिज कर दी गई थी। इसके बाद ही अब यह नया बैक सीरीज डाटा सामने आया है।
ऐसे बदल गए हैं यूपीए के आंकड़े
वित्त वर्ष पुरानी दर नई दर
2006 9.3 फीसदी 7.9 फीसदी
2007 9.3 फीसदी 8.1 फीसदी
2008 9.8 फीसदी 7.7 फीसदी
2009 3.9 फीसदी 3.1 फीसदी
2010 8.5 फीसदी 7.9 फीसदी
2011 10.3 फीसदी 8.5 फीसदी
2012 6.6 फीसदी 5.2 फीसदी