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G-20 Summit: विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में जन-धन, आधार और मोबाइल की तिकड़ी को सराहा, दिया ये सुझाव

Fri, 08 Sep 2023 03:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 08 Sep 2023 03:36 PM IST
सार

G-20 Summit: विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल छह वर्षों में भारत ने 80% वित्तीय समावेशन दर हासिल की है, यह एक ऐसी उपलब्धि जिसमें डीपीआई  के बिना लगभग पांच दशक लग जाते। रानी मैक्सिमा ने कहा, "ब्राजील, एस्टोनिया, पेरू और सिंगापुर सहित अन्य देशों ने इसी तरह डीपीआई मॉडल को अपनाया है, जिससे ठोस परिणाम मिले हैं जो इस दृष्टिकोण की प्रभावकारिता को रेखांकित करते हैं।" 
 

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G20 Summit: World Bank report proposes tech-driven financial inclusion
जी20 सम्मेलन के लिए नई दिल्ली तैयार - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विश्व बैंक ने भारत, सिंगापुर और ब्राजील जैसे देशों द्वारा विकसित मॉडलों से प्रेरित प्रौद्योगिकी आधारित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की वकालत की है। इस बुनियादी ढांचे की कल्पना वित्तीय समावेशन प्राप्त करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थिरता  कार्यक्रमों को बढ़ावा देने में सरकारों की सहायता करने के लिए की गई है।

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यह सुझाव विश्व बैंक की एक रिपोर्ट से आया है, जिसका नाम है, 'डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से वित्तीय समावेशन और उत्पादकता लाभ को आगे बढ़ाने के लिए जी 20 नीति सिफारिशें'। जी-20 इंडिया की अध्यक्षता में शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure, DPI) को स्वैच्छिक रूप से अपनाने का समर्थन किया गया है। वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रिपोर्ट तैयार करने में मदद की।
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समावेशी वित्त के लिए विशेष अधिवक्ता (यूएनएसजीएसए) और जीपीएफआई की मानद संरक्षक नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, 'इंडिया स्टैक डिजिटल आईडी, इंटरऑपरेबल पेमेंट्स, डिजिटल क्रेडेंशियल्स लेजर और अकाउंट एग्रीगेशन के मामले में एक उदाहरण पेश रहा है। रिपोर्ट के अनुसा, "डीपीआई का प्रभाव समावेशी वित्त से परे है - यह स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थिरता का समर्थन कर सकता है। कोविड-19 महामारी के बीच, डीपीआई ने आपातकालीन सहायता को सीधे जरूरतमंद लोगों के डिजिटल वॉलेट में पहुंचाने में सक्षम बनाया और साथ ही तेजी से वैक्सीन वितरण की सुविधा में मदद की। 

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भारत ने केवल छह वर्षों में 80% वित्तीय समावेशन की दर हासिल की

रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल छह वर्षों में, इसने 80% वित्तीय समावेशन दर हासिल की है, यह एक ऐसी उपलब्धि जिसमें डीपीआई  के बिना लगभग पांच दशक लग जाते। रानी मैक्सिमा ने कहा, "ब्राजील, एस्टोनिया, पेरू और सिंगापुर सहित अन्य देशों ने इसी तरह डीपीआई मॉडल को अपनाया है, जिससे ठोस परिणाम मिले हैं जो इस दृष्टिकोण की प्रभावकारिता को रेखांकित करते हैं।" 


रिपोर्ट में वित्तीय समावेशन में तेजी लाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई हैं। इसमें बैंक खातों, बायोमेट्रिक पहचान और मोबाइल नंबरों के लिंकेज पर प्रकाश डाला गया, जिससे भारत में वित्तीय समावेशन दर को बढ़ाने में मदद मिली।

भारत की वित्तीय समावेशन की रणनीति जेएएम पर निर्भर

रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत की वित्तीय समावेशन रणनीति जन-धन (J), आधार (A) और मोबाइल (M) की JAM तिकड़ी पर निर्भर करती है और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच के लिए अधिक कारगर खाता खोलने और भुगतान अनुप्रयोगों के लिए डिजिटल आईडी को एकीकृत करती है। इंडिया स्टैक ने लागत को कम करते हुए केवाईसी प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाया है। ई-केवाईसी का उपयोग करने वाले बैंकों ने अनुपालन की लागत को $0.12 से घटाकर $0.06 कर दिया। लागत में कमी ने कम आय वाले ग्राहकों को सेवा देने के लिहाज से अधिक आकर्षक बना दिया और वित्तीय संस्थानों ने नए उत्पादों को विकसित करते हुए लाभ अर्जित किया।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की प्रगति की छलांग में डीपीआई की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन डीपीआई की उपलब्धता पर आधारित अन्य नीतियां भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें अधिक सक्षम कानूनी और नियामक ढांचा तैयार करने, खाते के स्वामित्व का विस्तार करने के लिए राष्ट्रीय नीतियां और पहचान सत्यापन के लिए आधार का लाभ उठाने के लिए उठाए गए कदम शामिल हैं।

भारत के डीपीआई से संबंधित कार्यों के बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि भारत में खोले गए नो-फ्रिल खातों की संख्या मार्च 2015 में 15 कारोड़ से बढ़कर जून 2022 तक 46 करोड़ हो गई, जिसमें 26 करोड़ से अधिक खाते महिलाओं के हैं।



रिपोर्ट में अच्छी तरह से डिजाइन किए गए डीपीआई के विकास और अच्छी प्रथाओं के व्यापक रूप से स्वीकृत सेट के माध्यम से एक व्यापक सक्षम वातावरण तैयार करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि डीपीआई के अधिक समावेशी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रणालियों और प्रक्रियाओं को एक-दूसरे के साथ-साथ निजी और सार्वजनिक संस्थाओं की प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेशन करने में सक्षम बनाया जाए, जो खुले और सार्वजनिक रूप से सुलभ एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस के माध्यम से जुड़े हों।

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