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Freedom SIP: वित्तीय आजादी का आसान तरीका एसडब्ल्यूपी के साथ जुड़ती है एसआईपी, इस तरह काम करता है एसडब्ल्यूपी
Mon, 21 Aug 2023 06:40 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 21 Aug 2023 06:40 AM IST
सार
वित्तीय आजादी एक ऐसा लक्ष्य है, जिसकी चाहत हर इंसान को होती है। एक आम आदमी अपने आपको वित्तीय रूप से स्वतंत्र पा सके व मुरादें पूरी कर सके, इसकी कोशिश हर समय वह करता है। म्यूचुअल फंड उद्योग ने इसी तरह की थीम पर काम किया है, जिसे फ्रीडम एसआईपी कहा गया है। इसकी खासियत और नफा-नुकसान का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Istock
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विस्तार
डम एसआईपी निवेश करने की एक अनूठी सुविधा है, जो एक सिस्टमैटिक इन्वेेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) की ताकत को एक सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) के साथ जोड़ देती है। इस सुविधा से निवेशक एक अवधि में संपत्ति बढ़ा सकते हैं और फिर एसआईपी अवधि पूरी होने के बाद एसडब्ल्यूपी से नियमित रूप से नकदी प्राप्त करना शुरू कर सकते हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने 'फ्रीडम एसआईपी' के रूप में इसे पेश किया है।
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फ्रीडम एसआईपी ऐसे करता है काम
फ्रीडम एसआईपी चार चरणों की प्रक्रिया है। इसके लिए निवेशकों को एक सोर्स स्कीम चुननी होती है, जिसमें वे 8 साल, 10 साल, 12 साल, 15 साल, 20 साल, 25 साल या 30 साल में एसआईपी के माध्यम से निवेश करेंगे। इसका समय ज्यादा होता है, इसलिए निवेशक इक्विटी की एक विस्तृत शृंखला से लेकर एसआईपी तक का चुनाव कर सकते हैं। तय समय पूरा होने पर पैसा एक लक्षित योजना में चला जाएगा। लक्षित योजना वह योजना है जिससे निवेशक को एसडब्ल्यूपी के माध्यम से नियमित नकदी प्राप्त होगी।
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इस तरह काम करता है एसडब्ल्यूपी
यदि कोई निवेशक 10,000 रुपये का एसआईपी 10 वर्षों के लिए करता है तो एसडब्ल्यूपी राशि 15,000 रुपये होगी। निवेश का समय 15 साल तक बढ़ाया जाता है तो एसडब्ल्यूपी राशि 30,000 होगी। यदि निवेशक 20, 25 और 30 वर्षों तक निवेश करता है, तो एसडब्ल्यूपी राशि 50,000 रु, 80,000 रु और 1.2 लाख रुपये होगी। जब तक यूनिट्स लक्षित योजना में है, तब तक एसडब्ल्यूपी की प्रक्रिया जारी रहेगी। डिफॉल्ट एसडब्ल्यूपी राशि निवेश की गई एसआईपी राशि और निवेशक की चुनी गई अवधि के आधार पर अलग-अलग होगी। डिफॉल्ट मासिक एसडब्ल्यूपी भुगतान राशि उस संभावित राशि को बताती है जिसे निकाला जा सकता है।
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हाइब्रिड या डेट फंड का चुनाव करना सबसे अच्छा विकल्प
लक्षित योजना का उद्देश्य होल्डिंग फंड की तरह व्यवहार करना है। हाइब्रिड या डेट फंड चुनना सबसे अच्छा है, क्योंकि वर्षों में बनाए गए फंड को बाजार की अस्थिरता से बचाना जरूरी है। इस फंड से एसडब्ल्यूपी तब तक जारी रहेगी, जब तक धन उपलब्ध है। निवेशकों को वांछित एसडब्ल्यूपी राशि चुनने की स्वतंत्रता है। यदि वे एसडब्ल्यूपी राशि का उल्लेख नहीं करते हैं, तो उन्हें डिफॉल्ट एसडब्ल्यूपी राशि प्राप्त होगी, जो एसआईपी राशि और उनकी चुनी गई एसआईपी अवधि के आधार पर अलग-अलग होगी।
लगातार नकदी की सुविधा
फ्रीडम एसआईपी निवेशकों को एसआईपी समय पूरा करने के बाद नियमित रूप से नकदी प्राप्त करने की अनुमति देती है। इससे यह मदद मिलती है कि निवेशकों को खर्चों को पूरा करने के लिए एक स्थिर नकदी हो। निवेशकों के पास सोर्स स्कीम, लक्षित योजना और एसआईपी अवधि चुनने की आजादी होती है। इसमें वार्षिक टॉप-अप भी उपलब्ध है। यह सुविधा सुनिश्चित करती है कि एसआईपी और एसडब्ल्यूपी दोनों क्रमबद्ध तरीके से किए जाते हैं जिससे निवेशक को व्यवहारिक चुनौतियों से बचाया जा सके।
-यदि आप फ्रीडम एसआईपी जैसी सुविधा का फायदा उठाते हैं तो एक दशक या उससे अधिक सालों के बाद आप निश्चित तौर पर अपने वित्तीय लक्ष्य को बिना किसी परेशानी के हासिल कर सकेंगे।
एनएफओ पर म्यूचुअल फंड का जोर
म्यूचुअल फंड में बढ़ रहे निवेश से न्यू फंड ऑफर में भी तेजी आ रही है। अप्रैल-जून में 59 योजनाओं के लिए सेबी के पास मसौदा जमा हुआ है। श्रीराम म्यूचुअल फंड ने मल्टी एसेट एलोकेशन फंड लॉन्च किया है। नए फंड का लक्ष्य इक्विटी जैसी कई संपत्तियों में निवेश से लंबी महंगाई समायोजित धन निर्माण करना है। यह स्कीम डेट, सोना-चांदी ईटीएफ में निवेश करेगी। एक सितंबर तक निवेश कर सकते हैं।
वित्तीय लक्ष्य पूरा करने के लिए लिक्विड या ओवरनाइट फंड से एसआईपी, टॉप-अप या सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) से नियमित रूप से इस फंड में निवेश कर सकते हैं। एकमुश्त के लिए न्यूनतम 5,000 जबकि एसआईपी में एक हजार रुपये मासिक निवेश कर सकते हैं। कोई लॉक-इन अवधि नहीं है।
फंड के कोष का 65 फीसदी से 80 फीसदी इक्विटी में निवेश होगा। यह फंड क्रेडिट जोखिम से बचने को उच्च रेटिंग (एएए) से मध्यम अवधि के डेट में 10 फीसदी से 25 फीसदी निवेश करेगा। सरकार और सरकार समर्थित प्रतिभूतियों में, गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ में 10 फीसदी से 25 फीसदी, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट में 10 फीसदी तक के निवेश का विकल्प है।
पांच वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि मल्टी एसेट एलोकेशन फंड की श्रेणी में इक्विटी जैसे रिटर्न की कम अस्थिरता देखी गई है। इसलिए लक्ष्य पूरा करने के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।
-कार्तिक एल जैन, एमडी और सीईओ श्रीराम एसेट मैनेजमेंट