फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Flaws exposed in the investigation of gig workers; serious questions related to customer security arose

Report: गिग वर्कर्स की जांच में खामियां उजागर; 20 फीसदी पते गलत निकले, ग्राहक सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठे

Thu, 21 Aug 2025 02:16 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 21 Aug 2025 02:16 PM IST
सार

ऑथब्रिज की रिपोर्ट के अनुसार  20 प्रतिशत गिग वर्कर्स अपने पते के सत्यापन जांच में विफल रहे। वहीं गिग वर्कर्स से जुड़े तथ्यों में चार प्रतिशत की विसंगति दर देखी गई। इससे ग्राहक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार गिग वर्कर्स की संख्या 2030 तक बढ़ कर 2.35 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

विज्ञापन
Flaws exposed in the investigation of gig workers; serious questions related to customer security arose
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

देश में गिग वर्कर्स से जुड़ी सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। लगभग 20 प्रतिशत गिग वर्कर्स अपने पते के सत्यापन जांच में विफल रहे। इससे ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी और परिवहन क्षेत्रों में ग्राहक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑथब्रिज की एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: SEBI: आईपीओ से पहले भी कंपनियों के शेयरों की हो सकेगी खरीद-बिक्री; सेबी अध्यक्ष ने दिए संकेत, जानें सबकुछ
विज्ञापन


गिग वर्कर्स कौन होते हैं?

ये वो लोग हैं जो छोटे-मोटे काम करते हैं, जैसे कैब चलाना, ऑनलाइन डिलीवरी या फिर फ्रीलांसिंग करने जैसे काम। गिग वर्कर वह व्यक्ति होता है जो अस्थायी, लचीले या फ्रीलांस काम में लगा होता है, जिसे अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुविधा प्रदान की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोविड-19 महामारी के बाद गिग रोजगार विशेष रूप से साझा सेवाओं और लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में मांग में वृद्धि देखी गई है। इससे रोजगार की खोज के लिये प्लेटफार्मों में इससे संबंधित गतिविधियों में तेजी आई है।

2030 तक 2.35 करोड़ बढ़ सकती है गिग वर्कर्स की संख्या
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 में भारत में लगभग 77 लाख गिग वर्कर्स थे। यह संख्या 2029-30 तक बढ़ कर 2.35 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान में भारत में लगभग 80 लाख व्यक्ति गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में जुड़े हुए हैं।

कंपनियों के लिए वर्करों को ट्रैक करना मुश्किल
ऑथब्रिज की रिपोर्ट के अनुसार पते के सत्यापन की जांच नहीं होने से वर्करों को ट्रैक करने और उनका सत्यापन करने में मुश्किलें आ रही हैं। इससे डिलवरी एजेंट और कैब ड्राइवर जैसे गिग वर्करों पर बहुत अधिक निर्भर रहने वाली कंपनियों के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन गई है। 

पते सत्यापन में विफलता के कारण

  • अस्थायी आवास
  • बार-बार स्थान परिवर्तन
  • साझा आवास (शेयरड हाउसिंग)

Flaws exposed in the investigation of gig workers; serious questions related to customer security arose
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

चार प्रतिशत विसंगति दर
रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि गिग वर्कर्स से जुड़े तथ्यों में चार प्रतिशत की विसंगति दर देखी गई। इन गड़बड़ियों में अदालत से जुड़े अपराधों के रिकॉर्ड और फर्जी पहचान जैसे मामले शामिल हैं। विसंगतियों के बीच, 3.5 प्रतिशत गिग वर्कर्स का कानूनी इतिहास पाया गया। इसमें मारपीट और चोरी से लेकर यातायात संबंधी उल्लंघन तक के अपराध शामिल थे। 

प्रतिरूपण का मुद्दा
गिग इकॉनमी से जुड़ी सबसे गंभीर समस्या के तौर पर प्रतिरूपण (इंपर्सनेशन ) का मुद्दा सामने आया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई मामलों में जो व्यक्ति वेयरहाउस या डार्क स्टोर पर चेक-इन करता है, वही व्यक्ति डिलीवरी पूरी नहीं करता। दो व्यक्तियों के बीच यह मिलीभगत ने केवल प्लेटफॉर्म नीतियों का उल्लंघन करती है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप चोरी, माल गुम होना, धोखाधड़ी और खराब ग्राहक अनुभव जैसी घटनाएं भी होती हैं। 

सफेदपोश कर्मचारियों में छह प्रतिशत विसंगति दर
ये जोखिम सिर्फ गिग वर्कर्स तक ही सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि खासतौर से आईटी, बैंकिंग व दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में, सफेदपोश कर्मचारियों में 6 प्रतिशत विसंगति दर दर्ज की गई। बढ़ा हुआ वेतन, फर्ज अनुभव और अनुबंध उल्लंघन इसके प्रमुख कारण बनकर उभरे।

10 में से 1.3 कर्मचारी रोजगार जांच में असफल रहे, जबकि 17 प्रतिशत बायोडाटा उम्मीदवारों के दावों से मेल नहीं खाता था। इसके अलावा, 10 प्रतिशत पते सत्यापन जांच इसलिए विफल रही क्योंकि उनके स्थान का पता नहीं चल पाया या रेफरी ने विवरण की पुष्टि करने से इनकार कर दिया।

खराब नियुक्तियों से कर्मचारियों के वेतन पर पड़ता ह ैअसर
रिपोर्ट में खराब नियुक्ति प्रथाओं के वित्तीय जोखिम पर भी प्रकाश डाला गया है। साथ ही कहा गया है कि खराब नियुक्ति के कारण कर्मचारी के प्रथम वर्ष के वेतन का एक तिहाई या 30 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है।

कंपनियों पर विश्वसनीयता सुनिश्चित करने का पड़ रहा दबाव
रिपोर्ट के अनुसार गिग अर्थव्यवस्था का विस्तार जारी है। हालांकि शहरी केंद्रों में, सत्यापन और प्रतिरूपण की चुनौतियां बढ़ रही हैं। वितरण, परिवहन और संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों पर अब ग्राहक सुरक्षा और सेवा विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए अपनी जांच और सत्यापन प्रक्रियाओं को मजबूत करने का दबाव बढ़ रहा है। 



विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed