लॉकडाउन की मार: रोजगार नहीं मिले तो टेलीकॉम उपभोक्ताओं की कुल संख्या में भी आ सकती है गिरावट
लॉकडाउन के प्रभाव के कारण अवांछित टेलीकॉम सेवाओं में कमी आने की संभावना, महंगी सेवाएं अभी भी लोगों की पहुंच में बन रहीं बड़ी बाधा...
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लॉकडाउन के दौरान अधिकतम सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से मिल रही हैं। ऑनलाइन के बढ़ते चलन के कारण देश में स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य संबंधित उपकरणों की बिक्री में बढ़ावा दर्ज किया गया था। अनुमान था कि स्मार्टफोन और लैपटॉप की तरह टेलीकॉम सेवाओं में भी बढ़ोतरी होगी। लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि लॉकडाउन में कामबंदी के कारण भारी संख्या में लोगों की बेरोजगारी बढ़ने, नौकरियों के अवसर कम होने से कुल टेलीकॉम उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आ सकती है।
देश में पहले लॉकडाउन 1.0 के बाद की तिमाही (जून 2020) में ख़त्म तिमाही में लोगों के अनुमान के उलट कुल टेलीकॉम उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आई थी। लेकिन यह संख्या इसके पहले क्वार्टर की तुलना में लगभग 1.48 फीसदी कम थी। अनुमान है कि अगर रोजगार की स्थिति में सुधार न हुआ तो इस तिमाही में भी इसी तरह की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं जून 2020 में कुल टेलीकॉम उपभोक्ताओं की संख्या 116 करोड़ थी, जो इसके पूर्व की तिमाही से 1.48 फीसदी कम थी।
इतनी थी उपभोक्ताओं की संख्या
ट्राई की जून 2020 की रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल टेलीकॉम उपभोक्ताओं की संख्या 116 करोड़ से ऊपर थी। इसमें शहरी उपभोक्ताओं की संख्या 63.6 करोड़ और ग्रामीण क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या 52.3 करोड़ हो चुकी थी। कुल उपभोक्ताओं की संख्या में प्राइवेट ऑपरेटर्स सेवाओं के उपभोक्ताओं की संख्या 88.55 फीसदी और पब्लिक कंपनियों के उपभोक्ताओं की संख्या 11.45 फीसदी है। पब्लिक कंपनियों के उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है।
शहरी क्षेत्रों में टेली घनत्व 137.35 और ग्रामीण क्षेत्रों में 58.96 हो चुकी है। यानी शहरी क्षेत्रों में भारी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जो एक से अधिक माध्यमों से टेलीकॉम सेवाओं का उपयोग करते हैं। देश में वायरलेस टेलीकॉम सेवाओं के उपयोग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह संख्या 114 करोड़ हो चुकी है, जबकि लाइन आधारित सेवाओं के उपयोग में कमी आ रही है। इन उपभोक्ताओं ने उक्त अवधि में 2597.9 करोड़ जीबी डाटा का इस्तेमाल किया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
टेलीकॉम विशेषज्ञ अरविंद सब्बारवाल के मुताबिक़ देश में इस समय बेरोजगारी की दर लगभग 13 फीसदी पर पहुंच गई है। इस बार की बेरोजगारी में बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र के लोगों का है, जो टेलीकॉम सेवाओं के सबसे महत्वपूर्ण उपभोक्ता होते हैं। अगर जॉब सेक्टर में जल्द ही कोई बड़ा सुधार नहीं दिखाई पड़ता है तो इसका सीधा असर टेलीकॉम सेवाओं के कुल उपभोक्ताओं के रूप में देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसका सबसे नकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है, जहां स्मार्टफोन की ऊंची कीमत और इंटरनेट सेवाओं की महंगू दरें अभी भी इसके विस्तार में बड़ी बाधा बना हुई हैं। ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने से प्रति व्यक्ति इंटरनेट डाटा की खपत में भी वृद्धि हुई थी। इससे ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार में भी बढ़ोतरी हुई थी। लेकिन अगर बाज़ार की स्थिति में सुधार नहीं आता है, तो इसके इंटरनेट डाटा खपत के मामले में भी कमी आने की संभावना बन सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत में इंटरनेट खपत का सबसे बड़ा उपभोक्ता वर्ग स्मार्टफोन के जरिये ही इंटरनेट सेवाओं का उपभोग करता है।