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New India Coop Bank Fraud Case: फरार कारोबारी का बेटा गिरफ्तार, बैंक धोखाधड़ी मामले में ईओडब्ल्यू की कार्रवाई

Fri, 28 Feb 2025 10:50 AM IST
अभिषेक दीक्षित बिजनेस डायरी, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डायरी, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 28 Feb 2025 10:50 AM IST
सार

ईओडब्ल्यू ने इससे पहले बैंक के पूर्व महाप्रबंधक हितेश मेहता और रियल एस्टेट डेवलपर धर्मेश पौन समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। अधिकारी ने बताया कि मनोहर ने कथित तौर पर अपने पिता उन्नाथन अरुणाचलम उर्फ अरुण भाई को भागने में मदद की थी।

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EOW arrests son of absconding businessman in New India Coop Bank fraud case
न्यू इंडिया सहकारी बैंक के पूर्व महाप्रबंधक (जीएम) हितेश मेहता - फोटो : PTI

विस्तार

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपये के गबन के मामले में वांछित कारोबारी के बेटे को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ईओडब्ल्यू ने गुरुवार को फरार आरोपी उन्नाथन अरुणाचलम के बेटे मनोहर अरुणाचलम (33) को गिरफ्तार किया है। मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है।

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ईओडब्ल्यू ने इससे पहले बैंक के पूर्व महाप्रबंधक हितेश मेहता और रियल एस्टेट डेवलपर धर्मेश पौन समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। अधिकारी ने बताया कि मनोहर ने कथित तौर पर अपने पिता उन्नाथन अरुणाचलम उर्फ अरुण भाई को भागने में मदद की थी। जांच में पता चला है कि जब वह अपने पिता के साथ फरार हुआ था, तब वह भी उसके साथ था।
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अदालत में पेश किया जाएगा
अधिकारी ने बताया कि उसे बाद में अदालत में पेश किया जाएगा। ईओडब्ल्यू के अधिकारी पिछले कई दिनों से उन्नाथन अरुणाचलम की तलाश कर रहे हैं और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है। 
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हितेश ने अरुणाचलम को दिए थे 50 करोड़ रुपये 
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, बैंक के पूर्व महाप्रबंधक हितेश मेहता ने कथित तौर पर उन्नाथन अरुणाचलम को 50 करोड़ रुपये दिए थे, जो सोलर पैनल का कारोबार करते हैं। 50 करोड़ रुपये में से अरुणाचलम ने कथित तौर पर 33 करोड़ रुपये दो निजी ट्रस्टों में जमा कर दिए, ताकि उन्हें लाभ मिल सके।

10 करोड़ रुपये रखने की क्षमता थी
इससे पहले न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपये के गबन मामले में बड़ा अपडेट सामने आया था। बताया गया कि बैंक की प्रभादेवी शाखा में एक बार में 10 करोड़ रुपये रखने की क्षमता थी, लेकिन हैंडबुक में दर्ज प्रविष्टियों के मुताबिक आरबीआई के निरीक्षण के दिन तिजोरी में 122.028 करोड़ रुपये थे। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)  ने यह खुलासा किया था। दरअसल, ईओडब्ल्यू बैंक में 122 करोड़ रुपये के गबन की जांच कर रही है। 

तिजोरी से 122 करोड़ रुपये की नकदी गायब मिली
दरअसल, एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया था कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निरीक्षण टीम ने 11 फरवरी को प्रभादेवी स्थित बैंक की कॉरपोरेट ऑफिस शाखा का दौरा किया था। यहां उन्हें तिजोरी से 122 करोड़ रुपये की नकदी गायब मिली। उन्होंने बताया कि कॉरपोरेट ऑफिस शाखा की बैलेंस शीट में प्रभादेवी और गोरेगांव शाखाओं में बैंक की तिजोरी में 133.41 करोड़ रुपये दिखाए गए थे, जबकि उस दिन प्रभादेवी शाखा की बैलेंस शीट में 122.028 रुपये दर्ज थे। जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने पाया कि कॉरपोरेट ऑफिस में नकदी रखने की तिजोरी की क्षमता केवल 10 करोड़ रुपये थी, जबकि उन्हें वास्तव में तिजोरी में 60 लाख रुपये मिले। 

ऑडिटरों ने बैंक से गायब नकदी के बारे में सवाल क्यों नहीं किए?
अधिकारी के मुताबिक, आरबीआई के निरीक्षण के दिन गोरेगांव शाखा की तिजोरी में उन्हें 10.53 करोड़ रुपये की नकदी मिली। गोरेगांव शाखा की तिजोरी में भी 10 करोड़ रुपये रखने की क्षमता थी। उन्होंने कहा कि ईओडब्ल्यू अब इस बात की जांच कर रही है कि बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करने वाले ऑडिटरों ने बैंक से गायब नकदी के बारे में सवाल क्यों नहीं किए और कार्रवाई के लिए मामले को आगे क्यों नहीं बढ़ाया।


क्या है मामला?
मुंबई पुलिस ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक, लेखा प्रमुख और उनके सहयोगियों के खिलाफ 122 करोड़ रुपये के गबन का मामला दर्ज किया था। मामले को आगे की जांच के लिए शहर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया था, 'बैंक के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवर्षि घोष ने 14 फरवरी को मध्य मुंबई के दादर पुलिस थाने में जाकर पैसे के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई।' शिकायत के अनुसार उन्होंने बताया, 'बैंक के महाप्रबंधक और लेखा प्रमुख हितेश मेहता ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची। बैंक के प्रभादेवी और गोरेगांव कार्यालयों की तिजोरियों में रखे धन से 122 करोड़ रुपये का गबन किया।'

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