CII: 'पर्यावरण मंजूरियों का ढांचा हो एकीकृत', महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सीआईआई का सुझाव
भारतीय उद्योग परिसंघ ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए स्वचालित खनन अधिकार, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और एफटीए की सिफारिश की। सीआईआई अध्यक्ष ने ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों को विकसित करने की आवश्यकता बताई।
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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई अहम सिफारिशें सरकार के सामने रखीं। सीआईआई ने सुझाव दिया कि एक्सप्लोरेशन लाइसेंस प्राप्त करने वाली कंपनी को स्वचालित रूप से खनन का अधिकार भी मिलना चाहिए।
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पर्यावरणीय नियमों को सुव्यवस्थित करने की जरूरत
सीआईआई के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि पर्यावरणीय नियमों को सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए और प्रौद्योगिकी को अपनाकर उन्हें बेहतर बनाया जाना चाहिए। इसके लिए एक एकीकृत अनुपालन ढांचा बनाया जाना चाहिए जो केंद्र और राज्य स्तर की पर्यावरण मंजूरियों को समेकित करेगा।
खनिजों के डेटा प्रबंधन का दिया सुझाव
खनिजों के आंकड़ें की पारदर्शिता और उपलब्धता बढ़ाने के लिए सीआईआई ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स डेटा रिपॉजिटरी की स्थापना की सिफारिश की। मेमानी ने कहा कि इस क्षेत्र की लंबी निर्माण अवधि और जोखिमों को देखते हुए सरकार को वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और वित्तीय सहायता के जरिए निजी निवेश को प्रोत्साहित करना चाहिए। सीआईआई ने ऑस्ट्रेलिया, पेरू, चिली, इंडोनेशिया और ओमान जैसे संसाधन सम्पन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष अध्याय जोड़ने का भी सुझाव दिया।
ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों को विकास
इसके अलावा, भारत के महत्वाकांक्षी ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सीआईआई ने ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों को विकसित करने की आवश्यकता बताई। सीआईआई अब ऊर्जा परिवर्तन पर एक मिशन भी शुरू करेगा, जिससे उद्योगों को कम-कार्बन विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। मेमानी ने ऑटो सेक्टर में खनिजों की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऑटो सेक्टर में स्थिति चिंताजनक है। कुछ सबसे रूढ़िवादी कंपनियों ने भी अब उत्पादन के स्तर को कम करने के बारे में कुछ दिशानिर्देश देने शुरू कर दिए हैं।
मजबूत घरेलू मांग के कारण जीडीपी 6.4 से 6.5 प्रतिशत रहने की संभावना
सीआईआई अध्यक्ष ने आगे कहा कि मजबूत घरेलू मांग के कारण चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.4 से 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण इसमें गिरावट का जोखिम भी है।
वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारत की स्थिति बेहतर
इस वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच, भारत ने प्रतिरोध दिखाया है और चीन, यूनाइटेड किंगडम (यूके), अमेरिका और यूरो क्षेत्र जैसी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर विकास दर दिखाई है। उद्योग निकाय ने देश में कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए अगली पीढ़ी के सुधारों की भी सिफारिश की।