फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Enlightened leadership needed to resolve north-south divide on distribution of tax pool: Subbarao

Taxation: उत्तर-दक्षिण में करों का असमान वितरण दूर करने के लिए प्रबुद्ध नेतृत्व जरूरी, बोले पूर्व RBI गवर्नर

Wed, 01 May 2024 04:25 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 01 May 2024 04:25 PM IST
सार

उत्तर और दक्षिण में करों के असमान वितरण के मामले का समाधान करने के लिए केंद्र और राज्य स्तरों पर प्रबुद्ध नेतृत्व की जरूरत है जो राजनीति से परे देख सके और आगे के अनुकूल रास्ते पर आम सहमति बना सके। ये बातें आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कही है।

विज्ञापन
Enlightened leadership needed to resolve north-south divide on distribution of tax pool: Subbarao
टैक्स - फोटो : istock

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव देश में उत्तर और दक्षिण में करों के असमान वितरण पर अपनी राय रखी है। सुब्बाराव ने कहा है कि केंद्र और राज्य स्तर पर प्रबुद्ध नेतृत्व ही राज्यों के बीच कर पूल के असमान वितरण पर फैसला लेकर उत्तर-दक्षिण के जटिल अंतर को सुलझा सकता है। उन्होंने कहा है कि यह मामला वित्त आयोग की पहुंच से बाहर का है।

विज्ञापन

क्या है अमीर और गरीब राज्यों के बीच करों के असमान वितरण का मामला?

आंध्र प्रदेश के वित्त सचिव और केंद्रीय वित्त सचिव समेत विभिन्न पदों पर रह चुके सुब्बाराव ने अपनी नई किताब 'जस्ट ए मर्सीनरी: नोट्स फ्रॉम माई लाइफ एंड करियर' में राजकोषीय संघवाद के मुद्दों पर विस्तार से लिखा है। उन्होंने पीटीआई से कहा, ''इसके समाधान के लिए केंद्र और राज्य स्तरों पर प्रबुद्ध नेतृत्व की जरूरत होगी जो राजनीति से परे देख सके और आगे के अनुकूल रास्ते पर आम सहमति बना सके।" सुब्बाराव के अनुसार तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे अमीर राज्यों को केंद्र के करों में प्रत्येक रुपये के योगदान के बदले एक रुपये से कम हिस्सा मिलता है, जबकि बिहार और झारखंड जैसे गरीब राज्यों को एक रुपये से अधिक हिस्सा मिलता है। 

विज्ञापन


सुब्बाराव ने कहा, "अमीर राज्यों द्वारा गरीब राज्यों को इस तरह क्रॉस सब्सिडी देना हमारे जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में अपरिहार्य है और वास्तव में यह एक स्वीकृत सिद्धांत है।" 16वें वित्त आयोग (16 वें एफसी) की स्थापना की गई है और आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहतर दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों द्वारा उत्तरी और पूर्वी राज्यों को 'सब्सिडी' देने के मुद्दे पर बहस फिर से शुरू हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा, 'पहले ही अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उत्तर और दक्षिण के बीच मतभेद हैं। सवाल यह है कि क्या हम इस तरह की क्रॉस सब्सिडी की सीमा को पार कर रहे हैं? सुब्बाराव के अनुसार, कई प्रमुख आंकड़े बताते हैं कि दक्षिणी राज्य बुनियादी ढांचे, निजी निवेश, सामाजिक संकेतकों और कानून के शासन के मामले में बेहतर कर रहे हैं, जिसने उन्हें विकास और समृद्धि के एक अच्छे चक्र पर डाल दिया है और उत्तर-दक्षिण के बीच अंतर को और बढ़ा कर दिया है। 

दक्षिणी राज्यों में उत्तर की तुलना में जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई

जनसंख्या के अद्यतन आंकड़ों के आधार पर 2026 में होने वाले परिसीमन को देखते हुए, सुब्बाराव ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में, दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर उत्तर की तुलना में अधिक तेजी से गिरावट आई है। उन्होंने कहा, "अगर इसके परिणामस्वरूप, दक्षिणी राज्य संसद की सीटों के मामले में अपना हिस्सा खो देते हैं तो उन्हें सब्सिडी की सीमा को पार करने की खुली प्रतिबद्धता के साथ कम राजनीतिक दबदबे की दोहरी मार का सामना भी करना पड़ेगा।"

सुब्बाराव 5 सितंबर, 2008 को पांच साल के लिए आरबीआई के गवर्नर के रूप में कार्यभार संभालने से पहले वित्त सचिव (2007-08) थे। लेहमैन ब्रदर्स 16 सितंबर 2008 को दिवालियापन हो गया, जिससे यह इतिहास की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट विफलता बन गई। वर्ष 2010-11 के दौरान भारी निवेश के दौरान डॉलर को नहीं खरीदने और इसके बजाय रुपये को मजबूत होने देने को लेकर हुई आलोचना पर सुब्बाराव ने कहा कि यह सोच-समझकर लिया गया फैसला था।

सुब्बाराव ने कहा, 'भंडार को संभालना महंगा नहीं है, खासकर इसलिए क्योंकि हमारा भंडार उधार के संसाधनों से बना है। बाजार में आरबीआई का हस्तक्षेप अर्थव्यवस्था के एक खंड से दूसरे खंड में समायोजन के बोझ को स्थानांतरित करता है।" उन्होंने आगे बताया कि रिजर्व बैंक की घोषित नीति विनिमय दर में अस्थिरता को रोकने के लिए ही बाजार में हस्तक्षेप करने की है।

रिजर्व बैंक की 90वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का संदर्भ देते हुए सुब्बाराव ने कहा कि रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक स्वीकार्य बनाने के लिए केंद्रीय बैंक को अन्य शर्तों को पूरा करने के अलावा कम हस्तक्षेप करने वाला बनना चाहिए।

सरकारों की ओर से मुफ्त उपहार बांटने पर पूर्व आरबीआई गवर्नर ने की यह टिप्पणी

सरकारों की ओर से मुफ्त उपहार (फ्रीबीज) देने के बारे में एक सवाल के जवाब में सुब्बाराव ने कहा कि एक गरीब देश में जहां लाखों लोग अच्छी आजीविका कमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहां सबसे कमजोर तबकों को हस्तांतरण जरूरी है, वास्तव में यह अनिवार्य भी है। उन्होंने कहा, 'लेकिन यह सीमा के भीतर होना चाहिए, खासकर जब इन मुफ्त उपहारों को उधार लेकर वित्तपोषित किया जाता है।'


 
सुब्बाराव ने कहा कि राजनीतिक दल मतदाताओं को मुफ्त में लुभाने में एक-दूसरे से आगे निकल रहे हैं, यह वित्तीय रूप से खतरनाक है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि सभी राजनीतिक दल इसके लिए दोषी हैं और किसी एक पर दोष मढ़ने की कोशिश एक गलत शुरुआत होगी। आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने जोर देकर कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद सत्ता में आने वाली केंद्र सरकार को एक श्वेत पत्र जारी कर जनता को मुफ्त उपहार दिए जाने की लागत और लाभों के बारे में विस्तार से बताना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed