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Mumbai: एल्गार परिषद मामले में वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा की नकद जमानत याचिका खारिज, दी गई ये हिदायत

Mon, 31 Jul 2023 10:28 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 31 Jul 2023 10:28 PM IST
सार

Mumbai: अदालत ने  गोंजाल्विस और फरेरा जमानत के लिए अतिरिक्त शर्तें लगाईं और आरोपियों को 50 हजार रुपये का पीआर (व्यक्तिगत पहचान) बॉन्ड भरने और मामले के बारे में मीडिया से बात करने से परहेज करने का निर्देश दिया है।

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Elgar case: Release of Vernon Gonsalves, Arun Ferreira may get delayed as court rejects cash bail plea
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

एल्गार परिषद माओवादी संबंध मामले में आरोपी कार्यकर्ता वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा की रिहाई में देरी हो सकती है क्योंकि सोमवार को एक विशेष एनआईए अदालत ने अस्थायी नकद जमानत की उनकी याचिका खारिज कर दी।
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अदालत ने  गोंजाल्विस और फरेरा जमानत के लिए अतिरिक्त शर्तें लगाईं और आरोपियों को 50 हजार रुपये का पीआर (व्यक्तिगत पहचान) बॉन्ड भरने और मामले के बारे में मीडिया से बात करने से परहेज करने का निर्देश दिया है। नकद जमानत उस धन को संदर्भित करती है जो आरोपी जेल से रिहा होने के लिए भुगतान करता है, जबकि बॉन्ड आरोपी और अदालत के बीच एक लिखित समझौता है। कद जमानत की तुलना में बॉन्ड थोड़ा समय लेने वाली प्रक्रिया है।
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उच्चतम न्यायालय ने 28 जुलाई को दोनों को जमानत देते हुए कहा था कि वे पांच साल से हिरासत में हैं। शीर्ष अदालत ने उनसे कहा है कि वे महाराष्ट्र से बाहर न जाएं और अपने पासपोर्ट पुलिस को सौंप दें। अदालत ने दोनों कार्यकर्ताओं को एक-एक मोबाइल का इस्तेमाल करने और मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को उनके पते बताने का भी निर्देश दिया।
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विशेष एनआईए न्यायाधीश राजेश कटारिया ने सोमवार को दोनों की नकद जमानत पर रिहाई की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने दोनों को 50 हजार रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो मुचलके भरने का निर्देश दिया। मामले से जुड़े एक वकील ने कहा कि वे शुक्रवार तक औपचारिकताएं पूरी करने की कोशिश करेंगे, जिससे दोनों की रिहाई हो सके।


विशेष अदालत द्वारा लगाई गई अन्य शर्तों के अनुसार, कार्यकर्ता मीडिया के किसी भी रूप में मामले के बारे में कोई बयान नहीं दे सकते हैं, चाहे वह प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया हो। उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दिए बिना अदालत की कार्यवाही में भाग लेने का निर्देश दिया गया है। दोनों से कहा गया है कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों, जिसके संबंध में उनके खिलाफ वर्तमान मामला दर्ज किया गया है।
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