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आज से मूल सीमा शुल्क में कटौती: खाद्य तेल सस्ता होने का अनुमान, केंद्र सरकार ने घटाया आयात शुल्क
Thu, 24 Sep 2026 12:01 AM IST
ज्योति भास्कर
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 24 Sep 2026 12:01 AM IST
सार
केंद्र सरकार ने कच्चे और रिफाइंड सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क घटाया है। यह बदलाव 24 सितंबर, 2026 से प्रभावी होगा, जिससे खाद्य तेलों की कीमतें कम होने की उम्मीद है।
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आयात शुल्क में कटौती (सांकेतिक)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क घटाया है। कच्चे सोयाबीन और पाम तेल पर शुल्क 10 से 5 फीसदी, जबकि रिफाइंड पर 32.5 से 27.5 फीसदी हुआ। कच्चे सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10 फीसदी से शून्य, और रिफाइंड पर 32.5 से 22.5 फीसदी किया गया। ये बदलाव आज यानी 24 सितंबर से प्रभावी हो गए हैं।
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खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क घटाया, क्या उपभोक्ताओं को मिलेगी महंगाई से राहत?
केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल सहित विभिन्न खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (BCD) में कटौती की गई है। सरकार का लक्ष्य खाद्य तेलों की कीमतों को कम करके उपभोक्ताओं को राहत देना है। इससे समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
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अधिसूचना के अनुसार, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी किया गया है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी किया गया है।
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क्या है सरकार का उद्देश्य?
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि आयात शुल्क में कमी से खाद्य तेलों की लैंडेड लागत और खुदरा कीमतें घटेंगी। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और कुल मुद्रास्फीति कम होगी। यह कदम घरेलू रिफाइनिंग को भी बढ़ावा देगा। साथ ही, किसानों के लिए उचित मुआवजा बनाए रखने में मदद करेगा। 2025 में भी केंद्र ने कच्चे खाद्य तेलों, जैसे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल पर BCD 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया था। उस समय कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क अंतर 8.75 फीसदी से 19.25 फीसदी था।
क्या महंगाई पर पड़ेगा असर?
वित्त मंत्रालय की अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य मुद्रास्फीति में बदलाव आया है। प्रोटीन युक्त वस्तुएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और खाद्य तेल मूल्य दबाव के प्रमुख कारण बने हैं। जुलाई 2026 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित मुद्रास्फीति 5.52 फीसदी तक बढ़ गई थी, जो जून के 5.32 फीसदी से अधिक थी। वैश्विक वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए लगातार मुद्रास्फीति दबाव का स्रोत हैं। देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर निर्भर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वैश्विक वनस्पति तेल आपूर्ति में कमी का एक कारण पाम, सोयाबीन और रेपसीड तेलों का बायोफ्यूल उत्पादन की ओर मोड़ना है। एल नीनो की स्थिति फसल उपज और खाद्य कीमतों के लिए जोखिम बढ़ाती है।