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ED Action: ईडी ने धनशोधन के 299 आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की, 76 कंपनियां चीन से हैं नियंत्रित

Wed, 06 Mar 2024 04:48 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 06 Mar 2024 04:48 PM IST
सार

ED Action: नगालैंड के दीमापुर में धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष दायर अभियोजन शिकायत में 299 आरोपी व्यक्तियों और 78 संस्थाओं को नामजद किया गया है। अभियोजन की शिकायत में नामित कुल संस्थाओं में से 76 चीन से नियंत्रित संस्थाएं हैं। इनमें 10 के निदेशक चीनी मूल के हैं।

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ED files prosecution complaint against 299 accused, 76 Chinese-controlled entities in a money laundering case
ईडी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन के एक मामले में 299 आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं (76 चीनी नियंत्रित संस्थाओं सहित) और अन्य विदेशी नागरिकों द्वारा नियंत्रित दो अन्य संस्थाओं के खिलाफ केस दर्ज की है। यह मामला भोले-भाले निवेशकों को ठगने से जुड़ा हुआ है, जिन्हें पैसे निवेश करने पर बहुत बड़ा रिटर्न देने (बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो मुद्राओं के खनन के लिए उपयोग किए जाने) का दावा किया गया था। इसके लिए "एचपीजेड टोकन" के नाम से एक ऐप-आधारित टोकन का इस्तेमा किया गया था।

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नगालैंड के दीमापुर में धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष दायर अभियोजन शिकायत में 299 आरोपी व्यक्तियों और 78 संस्थाओं को नामजद किया गया है। अभियोजन की शिकायत में नामित कुल संस्थाओं में से 76 चीन से नियंत्रित संस्थाएं हैं (जिनमें 10 के निदेशक चीनी मूल के हैं) और दो अन्य संस्थाएं अन्य विदेशी नागरिकों की ओर से नियंत्रित हैं। अदालत ने मंगलवार को अभियोजन शिकायत में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया। उक्त 299 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ पीएमएलए, 2002 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनाया गया है।
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ईडी ने साइबर अपराध पुलिस स्टेशन, कोहिमा (नागालैंड) की ओर से भारतीय दंड संहिता, 1860 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। यह मामला भोले-भाले निवेशकों को ठगने से संबंधित था, उन्हें पैसे निवेश करने पर बहुत बड़े रिटर्न का वादा किया गया था। इसके लिए "एचपीजेड टोकन" के नाम से एक ऐप-आधारित टोकन का उपयोग किया गया था।
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ईडी की जांच से पता चला है कि मुखौटा कंपनियों की ओर से कई बैंक खाते और मर्चेंट आईडी खोले गए थे।  इसके निदेशक और मालिक डमी थे। ये खाते केवल अवैध ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और बिटकॉइन माइनिंग में निवेश से प्राप्त धन के रोटेशन और लेयरिंग के लिए खोले गए थे। ईडी के अनुसार 57,000 रुपये के निवेश पर तीन महीने के लिए 4,000 रुपये प्रति दिन रिटर्न का वादा किया गया था, लेकिन पैसे का भुगतान केवल एक बार किया गया और उसके बाद नए फंड की मांग की गई।


इससे पहले, ईडी ने देश भर में 44 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था और विभिन्न बैंकों में मुखौटा इकाइयों और वर्चुअल खातों की ओर से जमा कराई गई 176.67 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कर दी गई थी। इसके अलावा डमी कंपनियों के नाम पर रही 278.70 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां कुर्क की गईं। इस मामले में अब तक कुल 455.37 करोड़ रुपये की जब्ती और कुर्की की गई है।

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