ED Action: ईडी ने पीएफआई के पदाधिकारियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, जानें क्या है मामला?
ED Action: पीएफआई की ओर से विशेष अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में पीएफआई दिल्ली के अध्यक्ष परवेज अहमद, पीएफआई दिल्ली के महासचिव मोहम्मद इलियास और पीएफआई दिल्ली के कार्यालय सचिव अब्दुल मुकीत सहित अन्य आरोपियों के नाम हैं।
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ईडी ने दिल्ली की एक विशेष अदालत में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कई पदाधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में पीएफआई दिल्ली के अध्यक्ष परवेज अहमद, पीएफआई दिल्ली के महासचिव मोहम्मद इलियास और पीएफआई दिल्ली के कार्यालय सचिव अब्दुल मुकीत सहित अन्य आरोपियों के नाम हैं।
केंद्रीय एजेंसी ने पीएफआई पदाधिकारियों के खिलाफ विशेष अदालत में यह चार्जशीट संदेहास्पद फंडिंग से जुड़े मामले में दाखिल की है। इससे पहले आतंकवाद के आरोप में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई ने दावा था कि उसके कार्यकर्ता रमजान महीने में मस्जिदों में जाकर नमाजियों से नकद जकात लेते थे।
ईडी के अनुसार, आरोपी व्यक्तियों ने खुलासा किया है कि उन्होंने पीएफआई की ओर से फर्जी नकद चंदा जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाई है और अज्ञात व संदिग्ध स्रोतों के माध्यम से पीएफआई की बेहिसाब नकदी को बेदाग और वैध के रूप में परिवर्तित करने की कोशिश की है।
प्रवर्तन निदेशालय ने विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नवीन कुमार मट्टा व एडवोकेट मोहम्मद फैजान खान के जरिए दिल्ली की एक विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर किया है। "धन शोधन निवारण (पीएमएल) अधिनियम की धारा 44 आर/डब्ल्यू खंड 45 व पीएमएल अधिनियम की धारा 3 आर/डब्ल्यू खंड 70 के तहत यह चार्जशीट दाखिल की गई है। मामले में सत्र न्यायालय की ओर से कहा गया है कि इस पर 21 नवंबर, 2022 को संबंधित अदालत में विचार किया जाएगा।
ईडी ने यह भी कहा कि पीएमएलए के तहत हुई जांच के दौरान पता चला कि पिछले कई वर्षों में पीएफआई के पदाधिकारियों की ओर से रची गई एक आपराधिक साजिश के तहत देश और विदेश से पीएफआई और संबंधित संस्थाओं ने संदिग्ध धन जुटाया और इसे गुप्त रूप से अपने बैंक खातों में जमा किया।
पीएफआई फंडिंग की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पाया कि नमाजियों ने रमजान नहीं, बल्कि दूसरे महीनों में ज्यादा जकात दी। यह व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं लगा। ईडी अधिकारियों ने जकात देने वालों की सूची से कुछ लोगों के नाम छांटे और उनसे घर जाकर बात की। इन लोगों ने मस्जिद में बताई तारीख पर जकात देने से साफ इन्कार किया। कई ने तो कहा, उनकी जकात देने की हैसियत ही नहीं थी।