फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Economy: China overtook US to return as India largest trade partner

Economy: चीन की चाल से कैसे निपटेगी सरकार? अमेरिका को पछाड़ ड्रैगन बना नंबर वन व्यापारिक साझीदार

Fri, 16 Sep 2022 11:09 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 16 Sep 2022 11:09 PM IST
विज्ञापन
सार
Economy: भारत के लिए ज्यादा चिंता की बात यह है कि चीन के साथ हो रहे व्यापार में व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। जुलाई में चीन से होने वाले आयात में 45 फीसदी तक की वृद्धि हुई है, जबकि भारत से होने वाला निर्यात केवल 1.26 बिलियन डॉलर रह गया है...
loader
Economy: China overtook US to return as India largest trade partner
Economy: India-China Trade - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन-भारत के बीच डोकलाम और लद्दाख में बढ़े तनाव के बाद देश के कई संगठनों ने चीनी सामानों के बहिष्कार की अपील की थी। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ये अपील केवल भावनात्मक ज्यादा साबित हुई है। असलियत में चीनी सामान पर हमारी निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है और जुलाई महीने में चीन देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार बनकर उभरा है। चीन से जुलाई महीने में 11.49 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ है। इस दौरान चीन से आयात 45 फीसदी तक बढ़ गया है, जबकि अमेरिका 11.08 बिलियन डॉलर के साथ देश का दूसरे नंबर का व्यापारिक साझीदार हो गया है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भारत की चीन पर निर्भरता और ज्यादा बढ़ सकती है।

लगातार बढ़ रहा है व्यापार घाटा

भारत के लिए ज्यादा चिंता की बात यह है कि चीन के साथ हो रहे व्यापार में ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) लगातार बढ़ता जा रहा है। यानी दोनों देशों के बीच हो रहे व्यापार में पलड़ा बहुत हद तक चीन के पक्ष में झुका हुआ है, जबकि भारत चीन को बेहद सीमित मात्रा में वस्तुएं निर्यात कर रहा है। जुलाई में चीन से होने वाले आयात में 45 फीसदी तक की वृद्धि हुई है, जबकि भारत से होने वाला निर्यात केवल 1.26 बिलियन डॉलर रह गया है। इस तरह चीन से होने वाला निर्यात नौ बिलियन डॉलर से ज्यादा चीन के पक्ष में झुका हुआ है।



केंद्र ने देश को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ावा देकर देश को 2070 तक कार्बन शून्य बनाने की रणनीति बनाई है। इसके लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगातार लगाए जा रहे हैं। चूंकि देश सौर ऊर्जा उपकरणों के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर है, माना जा रहा है कि यह बिल लगातार बढ़ता रहेगा।

चीन ने अब केवल उपभोक्ता उत्पादों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा है, बल्कि वह उपभोक्ता वस्तुओं को उत्पादित करने वाली मशीनों और कच्चे माल के केंद्र के तौर पर बड़ी शक्ति बन चुका है, भारत जैसे दुनिया के तमाम देश उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन की मशीनों और कच्चे माल के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर हो गए हैं। सोलर एनर्जी की तरह फार्मा सेक्टर में दवाइयों से लेकर अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चीजों के लिए भी देश पूरी तरह चीन पर निर्भर है। चूंकि भारत की स्वास्थ्य संबंधी नीतियों के कारण इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ने वाला है, आने वाले वर्षों में भी यह व्यापार पूरी तरह चीन के पक्ष में झुका रहेगा। ऑटो मोबाइल सेक्टर के क्षेत्र में भी लगभग यही स्थिति बनी रहने का अनुमान है।

तकनीकी और निवेश का मुकाबला नहीं कर पा रहे उद्यमी

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. अरूण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि आर्थिक क्षेत्र में देश की बेहतर प्रगति के बाद भी हम चीन से लगातार पिछड़ रहे हैं। इसका बड़ा कारण है कि हमारे औद्योगिक घराने तकनीकी और निवेश के मामले में चीन का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। चीन ने अपने मानव श्रम को तकनीकी तौर पर बेहतर करने पर बहुत निवेश किया है, जबकि इसी सेक्टर में भारत ने कोई बड़ी पहल नहीं की है। चीन ने छोटी-छोटी वस्तुओं के उत्पादन के भी बड़े केंद्र स्थापित किए हैं, जिससे उसकी प्रति उत्पाद लागत बहुत कम हो जाती है, जबकि वही उत्पाद हमारे उद्योगपतियों को महंगा पड़ता है।


हमारे देश का ऑटोमोबाइल उद्योग, फार्मा सेक्टर, सौर ऊर्जा सेक्टर, मोबाइल निर्माण सेक्टर और ऑटो इंडस्ट्री भी बहुत हद तक चीन से आयातित कच्चे माल पर निर्भर करती है। यदि इन वस्तुयों का निर्माण हम घरेलू स्तर पर बहुत ज्यादा कर भी देते हैं, तब भी कच्चे माल के लिए हम चीन पर ही निर्भर करेंगे, जिसके कारण चीन की भूमिका हमारे लिए महत्त्वपूर्ण बनी रहेगी।

यदि भारत को चीन से मुकाबला करना है, तो इसके लिए लंबी अवधि की नीति अपनानी होगी। इसके लिए मानव श्रम को तकनीकी के मामले में दक्ष बनाना होगा, इसके लिए शिक्षा और रिसर्च क्षेत्र में भारी और दीर्घावधि निवेश की जरूरत रहेगी।  

ये उपाय आएंगे काम, लंबी रणनीति बनाये सरकार

डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि आर्थिक मामलों में तात्कालिक कदम बहुत कारगर नहीं होते। इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाने और उसे कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता होती है। यह सही है कि चीन पर हमारी निर्भरता उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में ज्यादा बढ़ रही है, लेकिन इसी दौरान केंद्र सरकार लगातार इस व्यापार घाटे को कम करने के प्रयास कर रही है।

भारत का आयात बिल सौर ऊर्जा पैनल की जरूरतों, मोबाइल उपकरणों के आयात और छोटे-छोटे घरेलू आइटम की जरूरतों के कारण बढ़ रही है। इसे कम करने के लिए सरकार मोबाइल कंपनियों के बड़े ब्रांड को घरेलू स्तर पर निर्माण कराने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है और अन्य क्षेत्रों में भी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी प्रकार खिलौनों के निर्माण को घरेलू स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है, सोलर पैनल, ई-चिप के निर्माण के लिए तकनीकी तौर पर दक्ष देशों से सहयोग बढ़ाया जा रहा है। इसका असर आने वाले समय में दिखाई पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed