रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, आर्थिक वृद्धि है सर्वोच्च प्राथमिकता
- रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने दिया बयान
- देश की आर्थिक वृद्धि इस समय की सर्वोच्च प्राथमिकता
- आर्थिक वृद्धि को लेकर हर नीति निर्माता चिंतित
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को पूरी बैंकिंग व्यवस्था में कर्ज एवं जमा पर दी जाने वाली ब्याज दरों को केन्द्रीय बैंक की रेपो दर में होने वाले उतार चढ़ाव के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे मौद्रिक नीति का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने में तेजी आयेगी।
आरबीआई गवर्नर दास ने उद्योग मंडल फिक्की की ओर से आयोजित सालाना बैंकिंग सम्मेलन में कहा कि दरों को बाहरी मानकों से जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है और मुझे उम्मीद है यह काम तेज गति से होना चाहिए।
दास ने कहा, 'मुझे लगता है कि अब नए ऋण को रेपो दर जैसे बाहरी मानकों से जोड़ने को औपचारिक रूप देने का सही समय आ गया है। हम इस पर निगरानी कर रहे हैं और जरूरी कदम उठाएंगे।'
उन्होंने कहा, 'हम नियामक के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे। बाजार के रुख को देखेंगे और ऐसे कदम उठाएंगे जो कि नए कर्ज को रेपो या अन्य बाहरी मानकों से जोड़ने में मदद करेंगे।'
गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि बैंकों ने अपनी ब्याज दरों खासकर नए कर्ज को रेपो और अन्य बाहरी मानकों से जोड़ना शुरू कर दिया है।
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आर्थिक वृद्धि इस समय की सर्वोच्च प्राथमिकता
दास ने कहा है कि देश की आर्थिक वृद्धि इस समय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आर्थिक वृद्धि को लेकर हर नीति निर्माता चिंतित है। उन्होंने कहा कि सुस्ती के संकेतों के साथ उम्मीद से कम वृद्धि वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए प्रमुख जोखिम है। हालांकि , बैंकों को झटके सहने के लिए अधिक लचीला बनाया जा रहा है।
बैंकों की मदद करेगा IBC में संशोधन
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने ये भी कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन सार्वजनिक बैंकों की मदद करेगा। बैंक सरकार पर निर्भर होने के बजाए बाजार से पूंजी लेने में सक्षम होंगे।
दास ने कहा कि रिजर्व बैंक कुछ नियमों की समीक्षा कर रहा है। राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) की ओर से पेश सभी नियम आवास वित्त कंपनियों के लिए जारी रहेंगे। फिलहाल उन्होंने एनबीएफसी ( NBFC) की परिसंपत्ति की गुणवत्ता की समीक्षा से इनकार किया है।
शक्तिकांत दास ने जताई ये उम्मीद
इसके साथ ही आरबीआई के गवर्नर ने सार्वजनिक बैंकों में कंपनी संचालन की तत्काल समीक्षा का आह्वान किया और ज्यादा से ज्यादा बैकों के रेपो आधारित ऋण की ओर बढ़ने की उम्मीद जताई।