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विशेषज्ञों की रायः पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य मुश्किल

Fri, 29 Nov 2019 09:03 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 29 Nov 2019 09:03 PM IST
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economic experts says that economy will not become five lakh crore dollar in five years
जीडीपी में गिरावट - फोटो : SELF

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सुस्ती जारी रहने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के लिए पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना खासा मुश्किल हो सकता है। दरअसल जीडीपी के आंकड़ों में निवेश में सुस्ती के भी संकेत मिले हैं, जबकि अर्थव्यवस्था के आकार को बढ़ाने के लिए निवेश को अहम माना जाता है। वहीं विशेषज्ञों ने सरकार की तरफ से दी जा रही नीतिगत राहत का फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिलने की भी आशंकाएं जाहिर कीं।

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जीडीपी के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-20 की दूसरी तिमाही के दौरान सकल निश्चित पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) अनुमानित रूप से 10.83 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में यह आंकड़ा 11.16 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएफसीएफ को अर्थव्यवस्था के लिए निवेश का पैमाना माना जाता है।
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जीडीपी की शब्दावली में देखें तो सितंबर, 2019 में समाप्त तिमाही के दौरान वर्तमान और स्थिर (2011-12) मूल्य पर जीएफसीएफ क्रमश: 27.3 फीसदी और 30.1 फीसदी रहा, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में यह 29.2 फीसदी और 32.4 फीसदी रहा था। इस प्रकार वर्तमान और स्थिर मूल्य पर जीएफसीएफ में 0.9 फीसदी और 3 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
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पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि मौजूदा हालात में सरकार के लिए 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने में अतिरिक्त एक साल लग सकते हैं, जबकि वर्ष 2024-25 के लिए यह लक्ष्य तय किया है।


इंडिया रेटिंग्स (फिच समूह) के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. सुनील सिन्हा ने कहा कि लगातार दूसरी तिमाही में जीएफसीएफ में कमी का मतलब है कि अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट के दौर में बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सुस्ती के लिए काफी हद तक मांग के साथ-साथ निर्यात में कमी भी जिम्मेदार है।

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