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Delhi High Court: गो फर्स्ट को विमानों का रख-रखाव करने की अनुमति, एयरलाइन की अपीलों पर पीठ ने दिए ये निर्देश

Wed, 12 Jul 2023 07:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 12 Jul 2023 07:52 PM IST
सार

Delhi High Court: मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ एयरलाइन के प्रबंधन के लिए दिवाला कानून के तहत नियुक्त समाधान पेशेवर (आरपी) की अपीलों पर सुनवाई कर रही थी।

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Delhi HC permits Go First to maintain leased aircrafts
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को संकटग्रस्त गो फर्स्ट एयरलाइन को पट्टे पर दिए गए विमानों का रखरखाव करने की अनुमति दे दी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ एयरलाइन के प्रबंधन के लिए दिवाला कानून के तहत नियुक्त समाधान पेशेवर (आरपी) की अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि डीजीसीए एयरलाइन की ओर से प्रस्तुत की गई परिचालन को फिर से शुरू करने संबंधी योजना पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। एकल न्यायाधीश ने पांच जुलाई को पारित एक अंतरिम आदेश में गो फर्स्ट पट्टेदारों को महीने में कम से कम दो बार अपने विमान का निरीक्षण करने और रखरखाव का काम करने की अनुमति दी थी।

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गो फर्स्ट को परिचालन की मंजूरी देने में लगेंगे कम से कम 15 दिन

एकल न्यायाधीश का यह आदेश कई पट्टेदारों की याचिकाओं पर पारित किया गया था, जिसमें विमानन नियामक डीजीसीए की ओर से उनके विमानों का पंजीकरण रद्द करने की मांग की गई थी, ताकि वे उन्हें एयरलाइन से वापस ले सकें। दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ जिसमें न्यायमूर्ति संजीव नरूला भी शामिल थे ने बुधवार को कहा कि डीजीसीए के अनुसार, उड़ान संचालन को फिर से शुरू करने के लिए गो फर्स्ट को आवश्यक मंजूरी देने में कम से कम 15 दिन लगेंगे, और इसलिए यह न्याय के हित में होगा कि मामले का अंतिम निर्णय एकल न्यायाधीश की ओर से स्वयं किया जाए।

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एकल न्यायाधीश से मामले में जल्द से जल्द फैसला करने का अनुरोध

पीठ ने कहा, "एकल न्यायाधीश से अनुरोध है कि वह जल्द से जल्द मामले पर फैसला करें। पक्षकारों के लिए सुनवाई की तारीख (तीन अगस्त) को आगे बढ़ाने के लिए आवेदन दायर करने का विकल्प खुला होगा और एकल न्यायाधीश से मामले पर जल्द फैसला करने का अनुरोध किया जाता है।"

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