{"_id":"613f4186f00fd47df00cbeef","slug":"deadline-for-uan-aadhaar-linking-extended-till-december-31-2021-for-these-workers","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईपीएफओ ने दी राहत: आधार को यूएएन से जोड़ने की समयसीमा बढ़ी, इन कर्मचारियों को होगा फायदा ","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
ईपीएफओ ने दी राहत: आधार को यूएएन से जोड़ने की समयसीमा बढ़ी, इन कर्मचारियों को होगा फायदा
Mon, 13 Sep 2021 05:48 PM IST
Amit Mandal
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 13 Sep 2021 05:48 PM IST
सार
आधार से यूएएन लिंक करने की समयसीमा बढ़ाकर ईपीएफओ ने लाखों कर्मचारियों को बढ़ी राहत दी है। खास तौपर इस फैसले से पू्र्वोत्तर के लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा।
विज्ञापन
EPFO
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लाखों कर्मचारियों को राहत देते हुए ईपीएफओ (EPFO) ने आधार को यूएएन (UAN) से लिंक करने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब कर्मचारी 31 दिसंबर तक अपने यूएएन को आधार से लिंक कर सकते हैं। इससे पहले इसकी आखिरी तारीख 31 अगस्त थी. ईपीएफओ ने ट्वीट के जरिए ये जानकारी दी है।
विज्ञापन
ईपीएफओ के सदस्यों के लिए अपने ईपीएफ अकाउंट को आधार से लिंक करवाना अनिवार्य है। सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत ईपीएफओ ने यूएएन को आधार से जोड़ने का निर्णय लिया था। इसके तहत सभी सदस्यों का यूएएन भी आधार वेरिफाइड होना जरूरी है। इसलिए ईपीएफ अकाउंट को आधार से जोड़ना और यूएएन को आधार वेरिफाइड करना जरूरी है।
विज्ञापन
ईपीएफओ का कहना है कि कोरोना वायरस के कारण आई दिक्कतों के कारण यूएएन को आधार से जोड़ने में मुश्किलें आईं। इसे देखते हुए ईपीएफओ ने केंद्र सरकार से मंजूरी लेकर यूएएन को आधार से जोड़ने की समयसीमा बढ़ा दी।
विज्ञापन
ईपीएफओ के मुताबिक, उत्तर-पूर्व क्षेत्र जिसमें असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं, यहां के ईपीएएफओ सदस्यों के लिए आधार से यूएएन लिंक करने के लिए ईसीआर भरने की समयसीमा 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ा दी गई है।
साथ ही ईपीएफओ ने कहा है कि दूरस्थ इलाकों में अस्थिरता, कार्यस्थलों में लगातार बदलाव और दूसरी दिक्कतों के कारण ये फैसला लिया गया। खास तौर पर बीड़ी बनाने वाले, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों और प्लांटेशन इंडस्ट्री के कर्मचारियों के सामने आई मुश्किलों के कारण समयसीमा बढ़ाई गई है।