पहली छमाही में 4.42 लाख करोड़ उधार लेगा केंद्र, बढ़ेगा चालू खाता घाटा
- आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा, कल्याणकारी योजनाओं में खर्च होगी राशि
- 17 हजार करोड़ रुपये का उधार हर सप्ताह लेना होगा सरकार को
- 5.71 लाख करोड़ रुपये की बाजार उधारी 2018-19 में जुटाई थी सरकार ने
विस्तार
एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष की पहली छमाही में सरकार बाजार उधारी के जरिये 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। इसका इस्तेमाल सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा। दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ने कहा है कि घरेलू जमा में गिरावट आने से चालू खाते का घाटा और बढ़ेगा जबकि राजस्व घाटा संशोधित लक्ष्य को पहले ही पार कर चुका है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शुक्रवार को बताया कि एक फरवरी को आए अंतरिम बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 7.1 लाख करोड़ रुपये की सकल बाजार उधारी का प्रस्ताव किया है। इसमें से 2.36 लाख करोड़ रुपये पुनर्भुगतान (रिपेमेंट) में जाएंगे।
इस तरह आलोच्य वर्ष में 4.73 लाख करोड़ रुपये की शुद्घ बाजार उधारी रहेगी। उन्होंने बताया कि पहली छमाही में 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना है जो 26 सप्ताह तक 17,000 करोड़ रुपये प्रति हफ्ते बनता है। यह कुल बाजार उधारी का 62.3 फीसदी है।
साल की दूसरी तिमाही में 37.75 फीसदी राशि (2.68 लाख करोड़ रुपये) इसी तरीके से जुटाए जाएंगे। पहली छमाही में 1.02 लाख करोड़ रुपये जबकि दूसरी तिमाही में 1.34 लाख करोड़ रुपये का रिपेमेंट किया जाएगा।
राजकोषीय घाटा 134 फीसदी पार
चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा संशोधित बजट अनुमान के 134 फीसदी से ज्यादा पहुंच गया है। लेखा नियंत्रक ने बताया कि फरवरी, 2019 में ही राजकोषीय घाटा पूरे साल के अनुमान से ज्यादा निकल चुका है।
अप्रैल-फरवरी में जीडीपी के मुकाबले राजकोषीय घाटा 8.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया जो संशोधित बजट अनुमान में 6.34 लाख करोड़ था। इस साल राजस्व वसूली संशोधित लक्ष्य की 73.2 फीसदी रही, जो इससे पहले के साल में 78.2 फीसदी रही थी।
चालू खाते का घाटा पहुंचा 2.5 फीसदी
आरबीआई ने बताया कि देश का चालू खाते का घाटा (कैड) तीसरी तिमाही में बढ़कर जीडीपी के मुकाबले 2.5 फीसदी पहुंच गया है। पिछले साल की समान अवधि में यह 2.1 फीसदी रहा था। यह उछाल बढ़ते व्यापार घाटे की वजह से आया है।
अक्तूबर-दिसंबर 2018 की तिमाही में चालू खाते में विदेशी मुद्रा का इनफ्लो-आउटफ्लो का अंतर 16.9 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि में 13.7 अरब डॉलर था।
घरेलू जमा घटने से बढ़ेगी ब्याज दर
इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि इस साल घरेलू जमा में गिरावट आने से कैड की खाई और चौड़ी हो सकती है। साथ ही इसके असर से ब्याज दर भी ऊंची रह सकती है। एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2018 में घरेलू जमा 9.8 फीसदी बढ़कर 11.29 लाख करोड़ पहुंचा, जो 2012 में 6.43 लाख करोड़ रुपये था।