नए साल में कम हो सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, कच्चा तेल सस्ता होने से होंगे ये फायदे
- कच्चा तेल फिलहाल 55 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे हैं।
- पेट्रोल-डीजल के सस्ता होने से महंगाई से राहत मिलेगी।
- आयात बिल में राहत मिलेगी।
- कच्चे तेल की कीमत अब कम होने से हमारा ट्रेड डेफिसिट कम होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार कमी बनी हुई है। कच्चा तेल फिलहाल 55 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे हैं। ऐसे में तेल के दाम कम रहने और डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी बनी रहेगी। बुधवार को कारोबार में क्रूड का भाव 1.1 फीसदी गिरकर 50 डॉलर के भी नीचे आ गया। पिछले 1.5 साल में पहली बार इसका भाव इतने निचले स्तर पर आया है।
रुपया बना रहेगा सिरमौर
कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण भारतीय रुपया 2019 की पहली तिमाही में सर्वोच्च स्थान पर रहने की उम्मीद है। बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपया 2018 के मुकाबले 2019 में कारोबारियों के साथ-साथ आम आदमी को ज्यादा खुशी देगा।
2018 में डॉलर की मजबूती के चलते रुपया एशिया में सबसे निचले स्तर पर चला गया था। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में मानक ब्रेंट कच्चा तेल 2.26 प्रतिशत गिरकर 14 माह के निम्न स्तर 54.26 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर चल रहा है।
2016 से हुआ बड़ा उतार-चढ़ाव
हाल के कुछ वर्षों में कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल के साथ ही तेज गिरावट भी दर्ज की गई। वर्ष 2016 में जो ब्रेंट क्रूड 30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह 2017 में 60 और 2018 में 80 डॉलर प्रति बैरल तक के स्तर पर आ गया था।
ऐसे में जिन फंड हाउसेस ने ऑयल में निवेश कर रखा था उन्होंने अपना मुनाफा 2 गुना से ज्यादा होते ही 2016-18 के दौरान प्रॉफिट बुकिंग कर अन्य सस्ते विकल्पों में अपना पैसा लगाना शुरू किया जैसे की गोल्ड। यह भी क्रूड में गिरावट की बड़ी वजह है।
42 बैरल तक आ सकते हैं दाम
यदि क्रूड की वर्तमान स्थिति की बात करें तो ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार अगर क्रूड में यही गिरावट जारी रही तो ब्रेंट क्रूड 40 से 42 डॉलर प्रति बैरल तक का स्तर छू सकता है। इस तरह कच्चे तेल की कीमतों में कमी आना न सिर्फ भारत, बल्कि अन्य विकासशील देश, जिनकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार तेल है। वे सभी निश्चित रूप से फायदे में रहेंगे।
और सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल
फिलहाल अगले तीन महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम गिरते रहेंगे, जिसका फायदा आम लोगों को मिलेगा। पेट्रोल-डीजल के सस्ता होने से महंगाई से राहत मिलेगी, वहीं लोगों के मासिक घरेलू बजट में भी इसका असर देखने को मिलेगा। फल-सब्जियां, खाने-पीने का अन्य सामान सस्ता होने से लोगों को काफी बचत होगी। इस बचत से वो कहीं भी निवेश कर सकते हैं, जो भविष्य में उनके लिए मददगार साबित होगा।
कम होगा आयात बिल
कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा होने और रुपये के प्रति डॉलर 70 के भी ऊपर चले जाने से पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल का अनुमान था कि वित्त वर्ष 2018-19 में आयात बिल 40 फीसदी के करीब बढ़कर 12500 करोड़ डॉलर हो सकता है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि आयात बिल में राहत मिलेगी।
व्यापार घाटा कम होगा
हमारे देश का आयात-निर्यात में सबसे ज्यादा आयात कच्चे तेल का होता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ता है। उस अनुपात में निर्यात नहीं बढ़ पाते हैं। आयात-निर्यात के इस बड़े अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। कच्चे तेल की कीमत अब कम होने से हमारा ट्रेड डेफिसिट कम होगा। क्योंकि अक्टूबर 2018 से अब तक कीमत में 35-40 प्रतिशत कमी आ गई है।