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Petrol-Diesel Price: पेट्रोल-डीजल 33 रुपये तक होना चाहिए सस्ता, कच्चा तेल साल के सबसे निचले स्तर 76 डॉलर पर
Mon, 12 Dec 2022 07:15 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 12 Dec 2022 07:15 AM IST
सार
कच्चे तेल को लीटर और रुपये के हिसाब से अनुमान लगाएं तो कीमत 9 महीने में 33 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा घटनी चाहिए। इसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट देखने को नहीं मिली है।
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कच्चे तेल के भाव में आई गिरावट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कच्चे तेल की कीमतें जुलाई, 2008 के बाद इस साल मार्च में 140 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थीं। उसके बाद से 46 फीसदी गिरावट के साथ यह इस साल सबसे निचले स्तर 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है।
कच्चे तेल को लीटर और रुपये के हिसाब से अनुमान लगाएं तो कीमत 9 महीने में 33 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा घटनी चाहिए। इसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट देखने को नहीं मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इसलिए आ रही है, क्योंकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जो आपूर्ति की अनिश्चितता थी, वह अब फीकी पड़ गई है।
क्रूड महंगा होने पर क्या हुआ असर
मार्च में जब क्रूड 140 बैरल डॉलर था (एक बैरल में 159 लीटर) तब अप्रैल में खुदरा महंगाई 8 साल के रिकॉर्ड स्तर 7.79% पर थी। महंगाई को कम करने के लिए आरबीआई ने मई से रेपो दरों में कटौती शुरू की। उम्मीद है कि नवंबर की महंगाई के आंकड़े जब इस हफ्ते आएंगे तो वह 6% रह सकते हैं। तेल महंगा होने का ज्यादा असर माल ढुलाई पर होता है। पेट्रोल और डीजल की घरेलू दरें इन ईंधनों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करती हैं। लेकिन अप्रैल के बाद से, घरेलू दरें स्थिर हो गई हैं, क्योंकि कंपनियों ने बाजार से कम कीमतों पर ईंधन बेचा और भारी नुकसान हुआ। ग्राहकों को वैश्विक मूल्य में गिरावट के लाभों को देने से पहले घरेलू कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई करेंगीं।
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रुपये में ऐसे समझें गणित
ब्रेंट क्रूड का मौजूदा दाम 76.10 डॉलर प्रति बैरल यानी 6,272.20 रुपये प्रति बैरल है। इसे प्रति लीटर के हिसाब से देखें तो 6,272 रुपये में 159 लीटर होता है। यानी कीमत 39.45 रुपये लीटर हुई। मार्च के महीने में 140 लीटर प्रति बैरल यानी 11,538 रुपये प्रति बैरल को प्रति लीटर में करें तो यह 72.57 रुपये प्रति लीटर था। ब्रेंट 9 माह में 33.12 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो चुका है।
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कच्चे तेल को लीटर और रुपये के हिसाब से अनुमान लगाएं तो कीमत 9 महीने में 33 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा घटनी चाहिए। इसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट देखने को नहीं मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इसलिए आ रही है, क्योंकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जो आपूर्ति की अनिश्चितता थी, वह अब फीकी पड़ गई है।
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क्रूड महंगा होने पर क्या हुआ असर
मार्च में जब क्रूड 140 बैरल डॉलर था (एक बैरल में 159 लीटर) तब अप्रैल में खुदरा महंगाई 8 साल के रिकॉर्ड स्तर 7.79% पर थी। महंगाई को कम करने के लिए आरबीआई ने मई से रेपो दरों में कटौती शुरू की। उम्मीद है कि नवंबर की महंगाई के आंकड़े जब इस हफ्ते आएंगे तो वह 6% रह सकते हैं। तेल महंगा होने का ज्यादा असर माल ढुलाई पर होता है। पेट्रोल और डीजल की घरेलू दरें इन ईंधनों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करती हैं। लेकिन अप्रैल के बाद से, घरेलू दरें स्थिर हो गई हैं, क्योंकि कंपनियों ने बाजार से कम कीमतों पर ईंधन बेचा और भारी नुकसान हुआ। ग्राहकों को वैश्विक मूल्य में गिरावट के लाभों को देने से पहले घरेलू कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई करेंगीं।
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रुपये में ऐसे समझें गणित
ब्रेंट क्रूड का मौजूदा दाम 76.10 डॉलर प्रति बैरल यानी 6,272.20 रुपये प्रति बैरल है। इसे प्रति लीटर के हिसाब से देखें तो 6,272 रुपये में 159 लीटर होता है। यानी कीमत 39.45 रुपये लीटर हुई। मार्च के महीने में 140 लीटर प्रति बैरल यानी 11,538 रुपये प्रति बैरल को प्रति लीटर में करें तो यह 72.57 रुपये प्रति लीटर था। ब्रेंट 9 माह में 33.12 रुपये प्रति लीटर सस्ता हो चुका है।