तेल की उच्च कीमतों से प्रभावित होगी भारतीय अर्थव्यवस्था: नोमुरा
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ड्रोन हमले से सऊदी अरब के तेल उद्योग को तगड़ा झटका लगा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। दरअसल, इस हमले से सऊदी अरब का तेल उत्पादन घटकर आधा रह गया है। इससे सोमवार को वैश्विक बाजार में क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतें 12 डॉलर प्रति बैरल 20 फीसदी बढ़ीं। जनवरी 1991 के बाद यह एक दिन की सबसे ज्यादा तेजी है।
जापानी वित्तीय सेवाओं के प्रमुख नोमुरा ने बढ़ती तेल कीमतों पर भारत के संबंध में कहा है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था में जब महंगाई बढ़ रही हो, मांग घट रही हो और बेरोजगारी दर उच्च हो, तो स्टेगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी) की स्थिति आती है।
भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है। इसलिए नोमुरा के अनुसार तेल की उच्च कीमतों का परिणाम महंगाई और मंदी के रूप में आ सकता है।
कच्चे तेल की सबसे बड़ी निर्यातक है अरामको
सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको दुनिया की सबसे अहम तेल कंपनियों में से एक है और कच्चे तेल की सबसे बड़ी निर्यातक है। साल 2018 में कंपनी ने 111 अरब डॉलर का लाभ कमाया था। ये एपल और गूगल की कंपनी एल्फाबेट के कुल सालाना लाभ से भी अधिक है।
सितंबर अंत तक सामान्य हो जाएगा उत्पादन
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा कि सितंबर अंत तक उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1.1 करोड़ बैरल कर ली जाएगी और नवंबर में यह 1.2 करोड़ डॉलर प्रतिदिन हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अब्कैक तेल शोधन इकाई की मौजूदा उत्पादन क्षमता 20 लाख बैरल प्रतिदिन है।