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कोरोना: एच-1बी और जे-1 वीजा नियमों की वजह से स्वास्थ्य सेवा में आ रही परेशानी
Thu, 16 Apr 2020 03:14 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Thu, 16 Apr 2020 03:14 PM IST
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अमेरिका में भारत समेत अन्य देशों के कर्मचारियों के लिए एच-1बी और जे-1 वीजा में कुछ तय नियमों की वजह से ऐसे वीजा रखने वाले डॉक्टर कुछ तय जगहों के बाहर इस संकट के समय में भी सेवा दे पाने में असमर्थ हैं।
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पत्र में ये बताया गया है कि एच-1बी और जे-1वीजा रखने वाले चिकित्सकों को खास मान्यता वाले स्थानों के बाहर सेवा देने की अनुमति नहीं है।
सांसदों ने अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन एजेंसी (यूएससीआईएस) के कार्यवाहक निदेशक केन कुकीनेली को पत्र लिखा है और इन प्रतिबंधों को लोक स्वास्थ्य संकट के समय हटाने की मांग की है ताकि इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए ऐसे डॉक्टर उपलब्ध हो पाएं।
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एच-वनबी वीजा वैसे तो ज्यादातर आईटी पेशेवरों के बीच लोकप्रिय है लेकिन यह वीजा विदेश के डॉक्टरों को भी जारी किया जाता है।
एच-वनबी वीजा खास विशेषता से जुड़ा होता है इसलिए ऐसे डॉक्टरों को किसी अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम में नहीं जोड़ा जा सकता है और न ही इन्हें अस्थायी तौर पर किसी अन्य स्थान पर तैनात किया जा सकता है।
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मौजूदा माहामारी के समय स्वास्थ्य अधिकारी इन विदेशी डॉक्टरों की सेवा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़े के अनुसार देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 638,00 मामले हैं और 31,000 लोगों की मौत हो चुकी है।
आईटी कर्मचारी कर रहे नियम बदलने की मांग
नियम के अनुसार, अगर किसी एच-1बी धारक का नियोक्ता उनका अनुबंध रद्द करता है तो कर्मचारी को यह वीजा स्थिति बरकरार रखने के लिए 60 दिन के भीतर नौकरी पाने की जरूरत होती है। भारत के आईटी कर्मचारी इस 60 दिन को 180 दिन करने की मांग कर रहे हैं। यूएससीआईएस के अनुसार भारतीय एच-1बी वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं।