CoronaVirus: एविएशन सेक्टर को रोज 150 करोड़ रुपये की चपत, कैसे पूरा होगा टॉप-3 में आने का सपना
- इस सेक्टर में नुकसान अभी और बढ़ेगा
- 585 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने से भारतीय विमानन उद्योग को 84 सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
- अब तक समग्र राजस्व में 40 फीसदी की गिरावट, घरेलू सेवा में 30 फीसदी घटत
- आम तौर पर रोजाना 4000 घरेलू, 500 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की आवाजाही रहती है
- अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता रहा है
- दुनिया के तीसरे बड़े एविएशन मार्केट बनने का सपना अब कैसे होगा पूरा
विस्तार
एविएशन इंडस्ट्री को चपत लगने की एक मुख्य वजह विभिन्न देशों का अपने हवाई क्षेत्र में उड़ानों पर रोक लगाना भी शामिल है। हवाई यात्रा करने वाले लोगों के मामले में भारत दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। देश की एविएशन इंडस्ट्री ने 2024 तक दुनिया का तीसरा बड़ा बाजार बनने का जो खाका तैयार किया था, कोरोना के चलते अब वह लक्ष्य आगे खिसकने की आशंका है।
585 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द, 8,400 करोड़ रुपये का फटका!
फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते 585 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की गई हैं। इससे भारतीय विमानन उद्योग को 8,400 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। समग्र रूप में देखें तो राजस्व में भी 40 फीसदी की गिरावट आई है। कई एयरलाइंस को अपनी उड़ानें पहले ही रद्द करनी पड़ीं, इनमें स्पाइस जैट, विस्तारा और गो एयर शामिल हैं।
यहां बता दें कि सेंटर फॉर एशिया पेसिफिक एविएशन ने अप्रैल 2020 तक हवाई उद्योग के दिवालियेपन की संभावना बताई थी, तो कुछ एयरलाइंस से जुड़े कर्मियों को वेतन में कटौती का सामना करना पड़ा। नेशनल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एंड फेसिलेटेशन एजेंसी के मुताबिक, विमानन उद्योग में बुनियादी ढांचे के विकास में 120 अरब डॉलर का निवेश करने की बात कही गई थी। इसका ब्लू प्रिंट भी तैयार हो गया था।
किस शहर के एयरपोर्ट का उन्नयन और कहां पर नए एयरपोर्ट बनाना, ये सब बातें तय हो चुकी हैं। अब कोरोना के चलते इस निवेश पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हो सकता है कि यह योजना अब कई साल आगे चली जाए।
राजस्व हुआ आधा
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक अधिकारी का कहना है कि हवाई उद्योग को कोरोना के चलते बहुत भारी नुकसान हो रहा है। कोरोना के संकट से पहले देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक दिन का राजस्व करीब 350-400 करोड़ रुपये था, जो कि अब घटकर आधा रह गया है।
देश में अगर सामान्य दिनों की बात करें तो रोजाना 4000 घरेलू और पांच सौ से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की आवाजाही रहती है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। कोरोना वायरस की वजह से बुकिंग में देरी, वीजा सस्पेंशन, उड़ान का रद्द होना और भारत आने वाली विभिन्न देशों की उड़ानों पर प्रतिबंध आदि शामिल हैं।
संकट से उबरने के लिए फिक्की ने दिए ये सुझाव
पेरोल टैक्स पर छूट देना, एविएशन टरबाइन फ्यूल 'एटीएफ' पर एक्साइज ड्यूटी कम करना, सरकार की तरफ से वित्तीय पैकेज देना और मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए भी केंद्र सरकार को आगे आना होगा। इसके अलावा एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के राजस्व हिस्से में भी कमी करने का सुझाव दिया गया है।