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अच्छी खबर: महामारी से प्रभावित हुए सभी क्षेत्र, लेकिन गुजरात के हीरा उद्योग पर कोई असर नहीं
Sat, 17 Apr 2021 02:23 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Sat, 17 Apr 2021 02:23 PM IST
सार
कोविड-19 के मामले बढ़ने और लॉकडाउन लगने की आशंका में प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में अपने गांवों की तरफ जाने लगे हैं। लेकिन गुजरात के सूरत शहर के हीरा उद्योग का दावा है कि मौजूदा स्थिति का डायमंड इंडस्ट्री पर फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है।
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हीरा उद्योग
- फोटो : pixabay
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विस्तार
कोरोना वायरस महामारी से सभ उद्योग प्रभावित हुए हैं। कोरोना संक्रमण के मामले और मौतों की संख्या में जारी वृद्धि के चलते खौफनाक माहौल बना हुआ है। कोविड-19 के मामले बढ़ने और लॉकडाउन लगने की आशंका में प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में अपने गांवों की तरफ जाने लगे हैं। लेकिन गुजरात के सूरत शहर के हीरा उद्योग का दावा है कि मौजूदा स्थिति का डायमंड इंडस्ट्री पर फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है।
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पांच लाख कर्मचारियों को काम पर रखा गया
सूरत डायमंड एसोसियेसन के मुताबिक सूरत शहर में 3,000 के करीब छोटे और बड़े हीरा कारोबारियों द्वारा पांच लाख कर्मचारियों को काम पर रखा गया है। यहां जयादातर प्रवासी मजदूर सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात के हैं जबकि केवल 10 फीसदी कामगार ही उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार से आते हैं। दुनियाभर में मशहूर सूरत की डायमंड इंडस्ट्री का सालाना कारोबार करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये का है।
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सूरत डायमंड एसोसियेसन के अध्यक्ष नानू वेकारिया ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इन पांच लाख कर्मचारियों में से केवल पांच फीसदी ही हाल में अपने गांवों को गए हैं। इनमें गुजरात और गुजरात से बाहर दोनों जगह के कामगार हो सकते हैं। वेकारिया ने कहा कि, 'कुछ प्रवासी मजदूर तो शादी-ब्याह और दूसरे सामाजिक कार्यों में शामिल होने के लिए गए हैं जबकि कुछ लोग लॉकडाउन के डर से भी शहर छोड़कर गए हैं। वहीं कुछ अपने बीमार माता- पिता और संबंधियों की खोज खबर लेने भी गए हैं।'
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अब तक डायमंड पॉलिश उद्योग पर कोई असर नहीं
आगे उन्होंने कहा कि अब तक डायमंड पॉलिश उद्योग पर इसका कोई असर नहीं है। हीरे कटिंग और उसे पॉलिश करने वाले ज्यादातर उद्यमों में कामकाज जारी है। थोड़े बहुत मजदूर गए हैं जैसे ही स्थिति सामान्य होगी वह भी लौट आयेंगे। बहरहाल, अब तक हीरा उद्योग पर प्रवासी मजदूरों के पलायन का कोई असर नहीं है।
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