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Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले पांच बातों का रखें ध्यान, सही फैसला लेने में मदद करेगा एसआईडी

Mon, 25 Nov 2024 04:02 AM IST
दीपक कुमार शर्मा कालीचरण, अमर उजाला
कालीचरण, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 25 Nov 2024 04:02 AM IST
सार

सही फंड चुनने के लिए बाजार में मौजूद स्कीम्स के बारे में हर जरूरी जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए सिर्फ ऑनलाइन रिसर्च करना काफी नहीं है। स्कीम से जुड़े कागजात को बारीकी से पढ़ें। 

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Consider Five importent things before investment in mutual funds
Mutual Fund - फोटो : Istock

विस्तार

म्यूचुअल फंड्स को खुदरा निवेशकों के लिए निवेश का बेहतर जरिया माना जाता है। लेकिन निवेश का यह तरीका तभी सफल हो सकता है, जब म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव बेहतर ढंग से और पूरी समझदारी के साथ किया जाए। सही फंड चुनने के लिए बाजार में मौजूद स्कीम्स के बारे में हर जरूरी जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए सिर्फ ऑनलाइन रिसर्च करना काफी नहीं है। स्कीम से जुड़े कागजात को बारीकी से पढ़ें। आप ऐसा करेंगे तो रिस्क प्रोफाइल व निवेश के लक्ष्य के हिसाब से सही फैसले ले पाएंगे।

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म्यूचुअल फंड की रणनीतियों, उद्देश्यों और उससे जुड़े तमाम जोखिमों की जानकारी के लिए स्कीम इनफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट (एसआईडी) और फैक्ट शीट्स बेहद जरूरी दस्तावेज हैं। यह डॉक्यूमेंट सही फैसला लेने में मदद कर सकता है। इसके लिए आपको यह पता होना चाहिए कि दस्तावेज में किन बातों को देखना है।
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1. फंड की समीक्षा
स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के पहले हिस्से में पर फंड की जानकारी होती है, जिसमें निवेश रणनीति और उद्देश्य का ब्योरा होता है। निवेश लक्ष्य में बताया जाता है कि स्कीम का मुख्य मकसद क्या है? लॉन्ग-टर्म कैपिटल ग्रोथ, नियमित आय या दोनों? यह भी बताया जाता है कि यह एक्टिव मैनेजमेंट वाली स्कीम है, जिसमें निवेश के फैसले फंड मैनेजर पर निर्भर हैं या यह किसी बेंचमार्क इंडेक्स को पूरी तरह कॉपी करने वाली पैसिव स्कीम है, जिन्हें आमतौर पर इंडेक्स फंड कहते हैं।
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2. निवेश रणनीति
स्कीम से जुड़े दस्तावेज में निवेश रणनीति की जानकारी होती है। इसके तहत फंड के निवेश दर्शन, क्षेत्र, एसेट क्लास और सेगमेंट्स जैसी बातें दी जाती हैं। यह देख लें कि फंड के जरिये इक्विटी, डेट या किसी और एसेट क्लास में किस तरीके से और किस अनुपात में निवेश होगा। कुछ फंड टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, या इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी किसी खास थीम पर भी फोकस करते हैं।

3. जोखिम क्षमता
हर निवेश के साथ कुछ जोखिम जुड़े होते हैं। मिसाल के तौर पर बाजार की स्थिति में उतार-चढ़ाव से जुड़ा जोखिम, ब्याज दरों में बदलाव से जुड़ा जोखिम। यह डेट फंड्स पर ज्यादा असर डालता है। क्रेडिट रिस्क, जो खास तौर पर कम रेटिंग वाले बांड्स में निवेश के साथ जुड़ा रहता है। कम तरलता वाली संपत्तियों के साथ तरलता का जोखिम होता है। रिस्क फैक्टर को जांचना बेहद जरूरी है, ताकि आप जोखिम बर्दाश्त करने की क्षमता के हिसाब से सही फंड को चुन सकें।

4. पिछला प्रदर्शन
कोई फंड अपने पैसे को किस तरह अलग-अलग क्षेत्रों, मार्केट सेगमेंट, इंडस्ट्री और भौगोलिक इलाकों में बांटकर निवेश करता है, इसकी जानकारी एसेट एलोकेशन के तहत दी जाती है। लार्ज कैप फंड बड़े कारोबार वाली मजबूत कंपनियों में निवेश करते हैं, जबकि स्मॉल कैप फंड उभरती कंपनियों के स्टॉक्स में पैसे लगाते हैं।

5. फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड
फंड मैनेजर का अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड फंड के प्रदर्शन को प्रभावित करता है। इसलिए उनके पिछले रिकॉर्ड देखना जरूरी है। इसमें उनके द्वारा प्रबंधित दूसरी स्कीम्स का प्रदर्शन भी शामिल है। फंड मैनेजर के पास बाजार की अलग-अलग स्थितियों में फंड प्रबंधन का अनुभव भी होना चाहिए।

इसके अलावा, एक्सपेंस रेशियो भी देखें। इसका मतलब है फंड की कुल पसिंपत्तियों का वह प्रतिशत जो प्रबंधन शुल्क और अन्य चीजों पर खर्च हो जाता है। अगर दो स्कीम्स का लंबे समय का रिटर्न एक जैसा हो, तो कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड में निवेश करें।


कर देनदारी के बारे में भी जरूर जानें

किसी भी फंड से शुद्ध रिटर्न को जानने के लिए उसमें निवेश से जुड़े टैक्स प्रावधानों और उनके असर को जरूर जानें। इक्विटी फंड में 12 महीने से ज्यादा की होल्डिंग के बाद के मुनाफे पर 12.5% एलटीसीजी टैक्स देना पड़ता है, जबकि एक साल में 1.25 लाख रुपये तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता। ईएलएसएस में निवेश पर आयकर एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है। नए नियमों के तहत डेट फंड को कितने भी समय तक रखें, उस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। -स्वीटी मनोज जैन, निवेश सलाहकार

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