मैदा और आटा के नाम पर ग्राहकों को नहीं होगा नुकसान, कंपनियों को करना होगा यह काम
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आटे के नाम पर मैदा बेचने वाली कंपनियां अब ग्राहकों का नुकसान नहीं कर पाएंगी। अब कंपनियों को अपने उत्पाद पर साफ तौर पर यह लिखना होगा कि वो आटे से बना है या फिर मैदा से।
30 अप्रैल तक लागू होंगे नए नियम
फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों से कहा है कि 30 अप्रैल से इस नियम को मानना जरूरी हो जाएगा। एफएसएसएआई ने कहा है कि कंपनियों को उत्पादों पर इस बात की जानकारी साफ शब्दों में लिखनी होगी।
अभी पैदा होता है भ्रम
देश भर में बिक रहे तमाम उत्पादों पर फिलहाल केवल व्हीट फ्लोर लिखा होता है। इससे लोगों को यह नहीं पता चलता है कि जो उत्पाद वो खरीद रहे हैं वो आटे से बना है या फिर मैदा से। अब कंपनियों को शुद्ध गेंहू से बना आटा (पूर्ण व्हीट फ्लोर) और रिफाइंड व्हीट फ्लोर (मैदा) लिखना होगा।
इन उत्पादों में सबसे ज्यादा भ्रम
पैकेट में बिकने वाला आटा, ब्रेड और बिस्किट जैसे उत्पादों को बेचने वाली कंपनियां ऐसा नहीं करती हैं। लोग शुद्ध आटा समझकर मैदे से बने उत्पाद ले जाते हैं। हालांकि अब इस नियम के लागू होने के बाद लोगों के मन में किसी तरह का कोई भ्रम नहीं रहेगा।