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Pakistan: चीन, सऊदी अरब और यूएई से पाकिस्तान को बड़ी राहत, 12 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान एक साल के लिए टालेंगे
Wed, 07 Aug 2024 05:19 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 07 Aug 2024 05:19 PM IST
सार
Pakistan: चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान को बड़ी राहत दी है। तीनों देश नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के 12 अरब डॉलर के कर्ज के भुगतान को एक साल के लिए टालने पर सहमत हो गए हैं। इससे पड़ोसी देश को आईएमएफ से राहत पैकेज हासिल करने में मदद मिलेगी।
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पाकिस्तान में आर्थिक संकट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान को बड़ी राहत दी है। तीनों देश नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के 12 अरब डॉलर के कर्ज के भुगतान को एक साल के लिए टालने पर सहमत हो गए हैं। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से इस महीने के अंत में नकदी संकट से जूझ रहे देश की सात अरब डॉलर के राहत पैकेज को मंजूरी देने के बीच लिया गया है।
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एक्सप्रेस ट्रिब्यून की बुधवार की खबर के अनुसार वित्त पर सीनेट की स्थायी समिति की मंगलवार को हुई बैठक के बाद वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने संवाददाताओं से कहा कि आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में कोई देरी नहीं होगी।
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खबर में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि कार्यकारी बोर्ड की बैठक 28 अगस्त को होनी है जिसमें सात अरब डॉलर के पैकेज को मंजूरी दी जाएगी। बयान में कहा गया है कि चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की ओर से लिए गए फैसले के बाद आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की बैठक के समय को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है। यह बैठक पाकिस्तान के तीन पारंपरिक कर्जदाताओं की ओर से दिए गए ऋण को लौटाए जाने की शर्त पर ही होनी थी।
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औरंगजेब ने यह भी बताया कि चीन, सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ओर से 12 अरब डॉलर की ऋण की समयावधि को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि आईएमएफ ने कार्यकारी बोर्ड की बैठक से पहले इन ऋणों को तीन से पांच साल के लिए आगे बढ़ाने के लिए कहा था।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यकता एक वर्ष के लिए ही ऋण की अवधि को बढ़ाए जाने की थी, लेकिन सरकार इन्हें तीन से पांच साल तक आगे बढ़वाने की की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि तीन द्विपक्षीय लेनदार मौजूदा नियमों और शर्तों पर ऋण लेने पर सहमत हुए थे।
आईएमएफ ने पिछले महीने सात अरब डॉलर के स्टाफ स्तरीय समझौते की घोषणा की थी, जिसके लिए कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी लिए जाने की जरूरत थी। वित्त मंत्री ने कहा कि जब एक साल पहले की तुलना में देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो गया है तो इन कर्जों पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मांग करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ ने तीन साल के कार्यक्रम अवधि में केवल 3-5 अरब डॉलर के वित्तपोषण अंतर की बात कही है, जो काफी प्रबंधनीय है।
औरंगजेब ने कहा, "पाकिस्तान को एक विदेशी वाणिज्यिक बैंक से भी एक प्रस्ताव मिला है, लेकिन हम आईएमएफ बोर्ड की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं, ताकि ऋणदाता को ब्याज दरों में कटौती करने के लिए कहा जा सके। उन्होंने नाम का खुलासा किए बिना कहा कि यह प्रस्ताव एक गैर-खाड़ी और गैर-चीनी वाणिज्यिक बैंक से आया था।"
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने 40 करोड़ डॉलर से कम का कर्ज देने की पेशकश की थी, लेकिन वह दो अंकों में ब्याज देने की मांग कर रहा था, जिसे सरकार भुगतान नहीं कर सकती थी। औरंगजेब ने कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के निदेशक मंडल से ब्याज दरों में कटौती के लिए मंजूरी मिलने का इंतजार करेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं जो दर्शाते हैं कि पाकिस्तान वृहद आर्थिक स्थिरता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने फिच रेटिंग एजेंसी के पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग में एक पायदान सुधार करने के फैसले और केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों में 1% की कटौती के फैसले को "व्यापक आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण तत्व" बताया।
यह पूछे जाने पर कि स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने पाकिस्तान की सीसीसी + रेटिंग में सुधार क्यों नहीं किया है, मंत्री ने कहा कि सीसीसी+ रेटिंग को बी नेगेटिव तक बढ़ाना एक बड़ी छलांग होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीनों रेटिंग एजेंसियां इस साल के अंत तक पाकिस्तान की स्थिति को सुधारकर बी नेगेटिव कर देंगी।