RBI ने किए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के नियमों में बदलाव, पीएम मोदी ने की थी शुरुआत
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के नियमों में भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ बदलाव किए हैं। बता दें कि कुछ कठिनाइयों की वजह से इस योजना के नतीजे सामने नहीं आ पाए थे, जिसके कारण चार सालों में मात्र 16 टन सोना ही जमा हो पाया है।
सरकार ने मंजूर की बैंकों की मांग
लंबी बातचीत के बाद सरकार ने बैंकों की मांग को मंजूर किया है। नए नियमों के तहत बैंकों को कुछ बड़े जमाकर्ताओं से खास शाखाओं में सीधे सोना जमा करने की इजाजत दी गई है। इसमें मंदिर ट्रस्ट, हाई नेटवर्थ व्यक्ति, फंड हाउस व ट्रस्ट शामिल हैं। इनके अतिरिक्त इसमें सरकारी इकाइयों को भी शामिल किया गया है। मंदिरों को इससे सुविधा होगी जिनके पास अनुमान है कि 4000 टन सोने का भंडार है।
सीपीटीसी देते हैं सोने की शुद्धता का सर्टिफिकेट
दरअसल बैंकों को सोने की शुद्धता की जांच के केंद्रों (सीपीटीसी) के साथ व्यवहार में कुछ दिक्कतें आ रही थीं। बैंक सीपीटीसी की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। सीपीटीसी सोना इकट्ठा कर शुद्धता की जांच करते हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को उनके सोने के लिए शुद्धता का सर्टिफिकेट मिलता है। खाता खुलवा कर उपभोक्ता अपने सोने को क्रेडिट भी करा सकते हैं। इसके बाद सीपीटीसी सोने को रिफाइनरी भेजते हैं जहां से अंतिम शुद्धता सर्टिफिकेट मिलता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को जमाकर्ताओं को सीधे रिफाइनरी में सोना जमा कराने की छूट भी दी है। इस संदर्भ में आरबीआई ने बैंकों को कहा है कि सभी राज्यों में सोना जमा करने वाली अपनी शाखाओं को चिन्हित करें।