केंद्र का यह कदम चमड़ा उद्योग में फूंकेगा नई जान, अब पीएसयू को करनी होगी यहां से खरीदारी
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केंद्र सरकार ने मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों तथा रक्षा बलों से देश में बने चमड़े के उत्पादों को खरीदने के आदेश जारी किए हैं। इससे देश के चमड़ा उद्योग में एक नई जान आने की प्रबल संभावना पैदा हो गई है और चमड़ा उद्यमी काफी उत्साहित हैं।
आने वाले दिनों में देश में चमड़ा उद्योग में एक नई क्रांति की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पंजाब लेदर फेडरेशन का कहना है कि घरेलू खपत से उद्यमियों में एक नई जान आएगी और अगर यह लहर चल निकली, तो लेदर उद्योग नंबर वन पर आ जाएगा।
इससे एक तरफ जहां देश में वस्तुओं और सेवाओं के विनिर्माण और उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं मेक इन इंडिया को प्राथमिकता मिलेगी। चमड़ा कारोबारी इसे लेकर अभी से योजना तैयार करने में जुट गए हैं, ताकि सरकारी ऑर्डर व डिमांड को समय पर पूरा किया जा सके।
केंद्र सरकार के आदेशों के मुताबिक, सैडलरी (घुड़सवारी में घोड़े की पीठ पर कसे जाने वाला जीन सहित अन्य सामान), यात्रा सामान, चमड़ा परिधान और ऊंचे स्थानों पर पहने जाने वाले जूते आदि की आपूर्ति करने वाले घरेलू विनिर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पादों में निश्चित मात्रा में घरेलू सामान का इस्तेमाल किया गया है।
यह है अनिवार्यता
कॉम्बैट जूते, सेफ्टी शू, फुटवियर सामान, सिंथेटिक अपर्स वाले खेल के जूते और चमड़े के अपर्स के लिए न्यूनतम 70 फीसदी स्थानीय सामग्री इस्तेमाल की जानी चाहिए। इसी तरह सैडलरी, यात्रा के सामान, चमड़ा परिधानों तथा दास्ताने आदि के विनिर्माताओं के लिए स्थानीय सामग्री की अनिवार्यता 60 फीसदी होगी। केंद्र सरकार इसे जमीनी स्तर पर लागू करने जा रही है। आदेश के मुताबिक, क्रियान्वयन की निगरानी का नोडल मंत्रालय डीआईपीपी होगा।
निर्यात में भी वृद्धि की उम्मीद
सरकार जहां घरेलू खपत बढ़ाने की तैयारी कर रही है, वहीं 2019 तक चमड़ा निर्यात और उत्पादन में 10 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है। वर्तमान में देश का चमड़ा निर्यात सालाना 5.66 अरब डॉलर का है और केंद्र सरकार का लक्ष्य इसमें आगामी वित्त वर्ष में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करने का है।
भारत ही नहीं, चमड़े के पहनावों की विदेशों में खासी मांग है। भारत की चमड़ा निर्यात में अच्छी-खासी भागीदारी है। मशहूर कंपनी बावा स्किन के मालिक आत्मजीत सिंह बावा का कहना है कि यह एक सराहनीय कदम है और इससे चमड़ा निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा और निश्चित तौर पर एक क्रांति आएगी। भारतीय उत्पादों की विदेशों में मांग है और अगर निर्यातकों की खपत भारत में अधिक हो जाती है, तो इससे फायदा ही होगा।
सरकार की अधिसूचना का इंतजार
पंजाब लेदर फेडरेशन के सचिव अजय ने कहा कि पिछले छह-सात साल से लेदर इंडस्ट्री की घरेलू खपत स्थिर चल रही थी और केंद्र सरकार का यह आदेश उद्योग में जान पैदा करने वाला है। चमड़ा उद्योग काफी उत्साहित है और सरकार की अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है। सरकार कौन-कौन से उत्पादों को भारत में ही खरीदने की सूची जारी करती है, उसके हिसाब से ही उद्यमी अपनी अगली बिजनेस योजना तैयार करेंगे।