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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   CBI: Rs 395 crore new case registered against former directors of Unitech Ltd, case related to IDBI Bank

CBI: यूनिटेक लिमिटेड के पूर्व निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज, 395 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप

Fri, 06 Jan 2023 05:58 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Fri, 06 Jan 2023 05:58 PM IST
सार

CBI: आरोपी यूनिटेक के संस्थापक केनरा बैंक में कथित धोखाधड़ी से संबंधित एक और सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि कंपनी 2012 में आईडीबीआई बैंक से कथित तौर पर 400 करोड़ रुपये की वेंडर बिल डिस्काउंटिंग (वीबीडी) सुविधा का लाभ उठा रही थी।

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CBI: Rs 395 crore new case registered against former directors of Unitech Ltd, case related to IDBI Bank
सीबीआई की छापेमारी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सीबीआई ने आईडीबीआई बैंक में 395 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में यूनिटेक लिमिटेड और उसके पूर्व निदेशकों के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि बैंक की शिकायत के करीब छह महीने बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कंपनी और उसके पूर्व प्रमोटर्स और निदेशकों रमेश चंद्र, अजय चंद्रा और संजय चंद्रा के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।

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आरोपी यूनिटेक के संस्थापक केनरा बैंक में कथित धोखाधड़ी से संबंधित एक और सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि कंपनी 2012 में आईडीबीआई बैंक से कथित तौर पर 400 करोड़ रुपये की वेंडर बिल डिस्काउंटिंग (वीबीडी) सुविधा का लाभ उठा रही थी। शिकायत में कहा गया है, 'रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी और इन्वेंट्री के ढेर के कारण कंपनी लिक्विडिटी असंतुलन का सामना कर रही थी। इसके कारण वीबीडी बिलों के भुगतान में देरी हुई थी। 
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अधिकारियों ने कहा कि कंपनी देनदारी का भुगतान करने के लिए सहमत हो गई और वीबीडी की देनदारी को अपने हाथ में लेते हुए 395 करोड़ रुपये का सावधि ऋण मांगा। शिकायत के अनुसार, 30 जून, 2022 तक यूनिटेक पर आईडीबीआई बैंक का एक्सपोजर 974.78 करोड़ रुपये था। इसमें कहा गया है कि ग्रांट थॉर्नटन की ओर से कंपनी के उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर किए गए फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि 74 परियोजनाओं में घर खरीदारों से प्राप्त धन का गबन किया गया और उसे कर चोरी के पनाहगाह देशों में भेज दिया गया।
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शिकायत में कहा गया है कि ये लेनदेन अज्ञात थे और ऑडिट में संबंधित संस्थाओं का खुलासा किया गया था। जिसके बाद शीर्ष अदालत ने यूनिटेक लिमिटेड के मौजूदा बोर्ड को निलंबित कर दिया था। 2015-2018 की अवधि के लिए आईडीबीआई बैंक की ओर से एक अन्य फोरेंसिक ऑडिट में पता चला कि उधारकर्ता कंपनी ने धोखाधड़ी, डायवर्जन और धन का दुरुपयोग किया था। अधिकारियों ने बताया कि बैंक ने सीबीआई से 395 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए कानून की उचित धाराओं के तहत 'उपयुक्त मामला' दर्ज करने को कहा है।

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