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कैग ने की केंद्र की खिंचाई: आईजीएसटी का राज्यों को बंटवारा त्रुटिपूर्ण बताया, रिजर्व फंड में उपकरों का कम हस्तांतरण किया

Mon, 29 Nov 2021 09:40 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 29 Nov 2021 09:40 PM IST
सार

कैग ने कहा कि फंड रिजर्व रखने के लिए उपकरों का राज्यों को कम हस्तांतरण किया गया। ऐसा कर के वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 में घाटे के आंकड़ों को कम दर्शाया गया। 

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CAG pulls up govt for erroneous process of IGST devolution to states, short-transfer of cesses to reserve funds
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विस्तार

देश के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने एकीकृत माल और सेवा कर (IGST)  के राज्यों के बीच बंटवारे की प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार की खिंचाई की है। 

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कैग ने कहा कि रिजर्व फंड के लिए उपकरों का कम हस्तांतरण किया गया। ऐसा कर के वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 में घाटे के आंकड़ों को कम दर्शाया गया। जीएसटी प्रणाली के तहत आईजीएसटी वह कर होता है, जो वस्तुओं और सेवाओं की अंतर-राज्यीय बिक्री पर लगाया जाता है। इसका बंटवारा केंद्र  और राज्यों के बीच 50:50 के अनुपात में किया जाता है। 

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केंद्र सरकार के खातों की पड़ताल करते हुए सोमवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा कि 13,944 करोड़ रुपये की राशि को 2018-19 में देश के समेकित कोष (CFI) में रखा गया था। हालांकि संशोधित आईजीएसटी अधिनियम में इस राशि के अस्थायी रूप से राज्यों के बीच बंटवारे की प्रक्रिया तय है। 
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कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के केंद्र के खातों में राजस्व व्यय के गलत वर्गीकरण, राज्यों को आईजीएसटी के बंटवारे में त्रुटि, रिजर्व फंड के लिए उपकरों का कम हस्तांतरण व रक्षा पेंशन से जुड़े खर्चों का समायोजन नहीं किया गया। इन सबका असर घाटे की गणना पर होता है। 

महालेखा परीक्षक ने कहा कि यदि उक्त आंकड़ों को घाटे के आंकड़ों में शामिल किया जाता तो बजट दस्तावेज में पेश घाटे की तुलना में वास्तविक घाटा बहुत ज्यादा होता। 


रेल मंत्रालय को वास्तविक रुख अपनाने की जरूरत: कैग
कैग ने कहा कि रेल मंत्रालय को अनुपूरक अनुदान मांगों को लेकर अधिक वास्तविक रुख अपनाने की जरूरत है। मार्च, 2020 में समाप्त वित्त वर्ष (2019-20) के लिए केंद्र सरकार के खातों की वित्तीय लेखा परीक्षा के अनुसार, रेल मंत्रालय के लिये 5,00,140.23 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। लोकसभा में पेश कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेल मंत्रालय को अनुपूरक अनुदान के रूप में 817.51 करोड़ रुपये मिले थे। यह प्रावधान अनुदान स्तर पर अधिक व्यय के अनुमान पर आधारित था। हालांकि, अंतिम व्यय मूल प्रावधान से कहीं कम था।

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