नई दूरसंचार नीति मंजूर, पैदा होंगे 40 लाख रोजगार, 50 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड स्पीड का लक्ष्य
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नई दूरसंचार नीति को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। इस नीति को राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (एनडीसीपी), 2018 नाम दिया गया है। इसके तहत, वर्ष 2022 तक क्षेत्र में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने और 40 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार ने नीति के तहत देश के हर नागरिक को 50 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड सेवा मुहैया कराने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही ऋण के बोझ से दबे दूरसंचार क्षेत्र को उबारने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है।
इसके लिए दूरसंचार कंपनियों की लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क, सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष के शुल्क की समीक्षा की जाएगी। क्योंकि इन सभी शुल्कों के चलते दूरसंचार सेवा की लागत बढ़ती है। उल्लेखनीय है कि स्पेक्ट्रम का ऊंचा मूल्य तथा अन्य संबंधित शुल्क दूरसंचार सेवा क्षेत्र की प्रमुख चिंता है। इस क्षेत्र पर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ है।
कारोबार सुगमता पर भी जोर
नई नीति में कारोबार सुगमता पर भी जोर दिया गया है। इसके मुताबिक, हर नागरिक को 50 एमबीपीएस की ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराने और 2020 तक देश की सभी ग्राम पंचायतों को एक जीबीपीएस तथा इसी अंतराल में 10 जीबीपीएस ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य रखा गया है।
इसके मुताबिक, देश के विकास को नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के माध्यम से गति देने के लिए क्षेत्र में 2022 तक 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया जाएगा। नीति का मकसद 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन-टू-मशीन कम्युनिकेशन है। इस नीति के जरिये राज्यों, केंद्रीय एजेंसियों, दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों और स्टार्टअप को पता चल सकेगा कि अगले कुछ सालों में केंद्र सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।
बाधाएं हटाना भी मकसद
कैबिनेट द्वारा मंजूर नीति में स्थापित लक्ष्यों में वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत का योगदान बढ़ाना, नवाचार का निर्माण, डिजिटल संचार क्षेत्र में स्टार्ट-अप को बढ़ाना भी शामिल है। साथ ही, भारत में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त आईपीआर का निर्माण, क्षेत्र में मानक आवश्यक पेटेंट का विकास, डिजिटल संचार प्रौद्योगिकी, नई आयु कौशल के निर्माण के लिए 10 लाख लोगों को प्रशिक्षण और पुन: कौशल, आईओटी पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार 5 करोड़ संबंधित उपकरणों तक बढ़ाना और चौथे मानक के उद्योग को तेज करना शामिल है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने नीति जारी करते हुए कहा था कि इसका मकसद डिजिटल संचार नेटवर्क की परिवर्तनीय शक्ति की बाधाओं को हटाना है।
उचित होंगी स्पेक्ट्रम की कीमतें
नीति के मसौदे में कहा गया है कि भारत के सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए स्पेक्ट्रम एक प्रमुख प्राकृतिक संसाधन है। इस कारण से प्रमुख रणनीतियों में नए ब्रॉडबैंड युग के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने और उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण पर इसमें कहा गया है कि डिजिटल संचार के लिए टिकाऊ और किफायती पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्पेक्ट्रम का मूल्य उचित होना चाहिए। वायरलेस फ्रीक्वेंसी आवंटन पर वायरलेस योजना और समन्वय (डब्ल्यूपीसी) के अलावा स्थायी सलाहकार समिति हो, ताकि अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बने।