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कैबिनेट: गेहूं की एमएसपी में वृद्धि, 2.79 लाख करोड़ रुपये की तीन योजनाओं को मंजूरी, जानिए मंत्री क्या बोले

Wed, 30 Sep 2026 03:32 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 30 Sep 2026 03:32 PM IST
सार

कैबिनेट ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया। साथ ही, पीएम धारा और दिल्ली के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सहित तीन बड़ी योजनाओं के लिए 2.79 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई।

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Cabinet Approves Rs 2.79 Lakh Crore for Three Key Schemes, Raises Wheat MSP
कैबिनेट के फैसले - फोटो : amarujala.com

विस्तार

केंद्रीय कैबिनेट ने किसानों और देश के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है। इसके साथ ही, तीन बड़ी योजनाओं के लिए कुल 2,79,157 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।

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रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाया गया है। अब गेहूं का एमएसपी 2,610 रुपये प्रति क्विंटल होगा। यह वृद्धि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करेगी। कैबिनेट ने रबी फसलों की मूल्य नीति के लिए 90,962 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए निर्धारित की गई है।
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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कृषि लागत व मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा छह प्रमुख रबी फसलों के लिए एमएसपी की अनुशंसा की गई है।

  • गेहूं: गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, जबकि इसके लिए सीएसीपी द्वारा अनुशंसित एमएसपी 2,610 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। इस दर पर किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर सबसे अधिक 106 प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा मार्जिन प्राप्त होगा।
  • सरसों / रेपसीड: सरसों की अनुमानित उत्पादन लागत 3,367 रुपये प्रति क्विंटल है और इसका अनुशंसित एमएसपी 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो लागत पर 96 प्रतिशत का मार्जिन प्रदान करता है।
  • मसूर: मसूर दाल की उत्पादन लागत 3,854 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले अनुशंसित एमएसपी 7,390 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है, जिससे किसानों को 92 प्रतिशत का मुनाफा मिलेगा।
  • चना: चने की अनुमानित उत्पादन लागत 3,751 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, जिसके लिए अनुशंसित एमएसपी 5,958 रुपये प्रति क्विंटल है। यह लागत पर 59 प्रतिशत का मार्जिन सुनिश्चित करता है।
  • जौ: जौ की उत्पादन लागत 1,447 रुपये प्रति क्विंटल है और इसका अनुशंसित एमएसपी 2,286 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो 58 प्रतिशत का मुनाफा मार्जिन देता है।
  • कुसुम: कुसुम की अनुमानित उत्पादन लागत 4,810 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले एमएसपी 7,215 रुपये प्रति क्विंटल अनुशंसित किया गया है, जो 50 प्रतिशत का मुनाफा मार्जिन प्रदान करता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय पीएम धारा योजना से संबंधित है। पीएम धारा (डेवलपिंग हार्मोनाइज्ड एंड एक्सलरेटेड रिन्यूएबल एनर्जी एक्सेस) के लिए 1,86,405 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। यह योजना नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने में सहायक होगी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के लिए भी मंजूरी मिली है। इस सिस्टम के लिए 1,790 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

किसानों को क्या लाभ मिलेगा?

सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की है। गेहूं का एमएसपी अब 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। यह वृद्धि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने में मदद करेगी। इससे कृषि क्षेत्र में स्थिरता और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है। रबी फसलों की मूल्य नीति के लिए 90,962 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

अन्य प्रमुख निर्णय कौन से हैं?

कैबिनेट ने पीएम धारा योजना के लिए 1,86,405 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की है। यह योजना नवीकरणीय ऊर्जा की पहुंच को सुसंगत और त्वरित करने पर केंद्रित है। कैबिनेट ने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ इंटर स्टेट ट्रांसमिशन प्रणाली के विकास के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी है। यह योजना 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

दिल्ली के लिए आईटीएमएस को भी मंजूरी मिली है। इस सिस्टम के लिए 1,790 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह दिल्ली में यातायात प्रबंधन को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।केंद्रीय कैबिनेट ने इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के कार्यान्वयन को भी मंजूरी दीहै यह परियोजना 42 चिन्हित यातायात गलियारों को कवर करेगी और इसे 24 महीनों में तीन चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा। इसके बाद बाद पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव किया जाएगा।

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