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Byju's Probe: कॉरपोरेट प्रशासन में खामियों कारण एडटेक फर्म बायजू के खिलाफ नई जांच, रिपोर्ट्स में किया गया दावा
Tue, 26 Nov 2024 02:27 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 26 Nov 2024 02:27 PM IST
सार
Byju's Probe: कभी 22 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन के साथ भारत का सबसे मूल्यवान स्टार्टअप रहा बायजू अब वित्तीय उथल-पुथल और कानूनी चुनौतियों से जूझ रहा है। कंपनी भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों में दिवालियापन की कार्यवाही में उलझी हुई है। खबर है कि अब सरकार ने कंपनी के खिलाफ नई जांच शुरू की है। आइए इस बारे में जानें।
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बायजू
- फोटो : X.com: @BYJUS
विस्तार
सरकार ने संकटग्रस्त एडटेक कंपनी बायजू की वित्तीय और लेखा प्रथाओं की नई जांच शुरू की है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले से परिचित सूत्रों ने बताया है कि नई जांच कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से पिछली समीक्षा के बाद की गई, जिसमें कंपनी में कॉरपोरेट प्रशासन में खामियों से जुड़ी जानकारी सामने आई।
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हैदराबाद में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के क्षेत्रीय कार्यालय को बायजू के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करने के लिए कहा गया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या कंपनी ने अपने वित्तीय विवरण गलत तरीके से प्रस्तुत किए हैं या फिर फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है।
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यह ताजा जांच कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा एक साल पहले किए गए निरीक्षण के बाद की गई है। हालांकि उस समीक्षा में बायजू में कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी समस्याएं पाई गईं, लेकिन वित्तीय गड़बड़ियों का कोई निर्णायक सबूत सामने नहीं आया।
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कभी 22 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन के साथ भारत का सबसे मूल्यवान स्टार्टअप रहा बायजू अब वित्तीय उथल-पुथल और कानूनी चुनौतियों से जूझ रहा है। कंपनी भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों में दिवालियापन की कार्यवाही में उलझी हुई है।
अक्तूबर में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिवालियापन न्यायाधिकरण के उस फैसले को पलट दिया, जिसने बायजू को एक प्रमुख लेनदार के साथ अपने ऋणों का निपटान करने की अनुमति दी थी। इस फैसले ने कंपनी को दिवालियापन प्रक्रिया में वापस ला दिया है, और इसके संचालन का नियंत्रण एक दिवालियापन समाधान पेशेवर को सौंप दिया गया है।
बायजू के शेयरों में हुई गिरावट ने इसके निवेशकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रोसस एनवी सहित प्रमुख निवेशकों ने अपने निवेश को राइट ऑफ कर दिया है। कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन ने हाल ही में कंपनी के पतन को स्वीकार करते हुए कहा कि इसका मूल्यांकन शून्य हो गया है।
भारत के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और बायजू की देखरेख करने वाले दिवालियापन समाधान पेशेवर की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। कंपनी ने खुद नई जांच के बारे में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
एक समय था जब बायजू को भारत के तेजी से बढ़ते एडटेक सेक्टर में सफलता की कहानी के रूप में मनाया जाता था। हालांकि, कंपनी को कर्ज चुकाने के मुद्दों से लेकर कुप्रबंधन के आरोपों तक, बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।