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Biz Update: ब्राजील ने भारत के साथ बढ़ाया सहयोग का हाथ, मुख्य आर्थिक सलाहकार बोले-विकास दर 6.8% रहने की उम्मीद

Tue, 23 Sep 2025 06:55 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क,अमर उजाला
बिजनेस डेस्क,अमर उजाला Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 23 Sep 2025 06:55 AM IST
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शेयर बाजार, कारोबार और वाणिज्य जगत की अहम खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अमेरिका की नई टैरिफ नीतियों से बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच ब्राजील ने भारत के साथ आर्थिक और कृषि क्षेत्र में गहरा सहयोग बढ़ाने की पेशकश की है। भारत में ब्राजील के राजदूत केनेथ फेलिक्स हजिन्स्की दा नोब्रेगा ने कहा कि यह समय दोनों उभरती ताकतों के लिए एक अवसर है। इस दौरान नोब्रेगा ने कहा, भारत और ब्राजील भरोसेमंद साझेदार हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में हमें और नजदीकी से काम करना होगा। हमारी अर्थव्यवस्थाओं और कृषि क्षेत्रों में कई समानताएं हैं, जिनका फायदा उठाकर हम नए अवसर बना सकते हैं।
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नोब्रेगा मैत्री 2.0 क्रॉस बॉर्डर एग्री-टेक कार्यक्रम के मौके पर बोल रहे थे, जो 26 सितंबर तक चलेगा। इसका मकसद दोनों देशों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को जोड़ना है, ताकि जलवायु परिवर्तन, मौसम और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का हल निकाला जा सके। नोब्रेगा ने बताया कि हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की ब्राजील यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 साल के लिए सहयोग का रोडमैप तय किया था।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार बोले-विकास दर 6.8% रहने की उम्मीद
 देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि जीएसटी 2.0 सुधारों और बजट में घोषित आयकर राहत का अर्थव्यवस्था पर गुणात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे वित्त वर्ष 2026 में वृद्धि दर 6.3 से 6.8% के ऊपरी स्तर की ओर बढ़ेगी। दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सात फीसदी के करीब रह सकती है। नागेश्वरन ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा, जीएसटी 2.0 ऐतिहासिक सुधार है। इससे घरेलू मांग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया, आयकर में कटौती से प्रत्यक्ष कर में राहत और जीएसटी में कटौती से अप्रत्यक्ष कर में राहत का संयुक्त प्रभाव 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। कुछ अन्य अनिश्चितताएं इस प्रभाव को कम कर सकती हैं।

तेजी से बढ़ रहा रियल टाइम भुगतान, आगे वृद्धि की रफ्तार घटने की आशंका  
देश में रियल-टाइम अकाउंट-टू-अकाउंट (एटूए) भुगतानों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, अगले पांच वर्षों में इनकी वृद्धि दर सालाना 4 फीसदी दर से धीमी रहने की संभावना है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने कहा, भारत में यूपीआई से अब हर महीने 19 अरब से ज्यादा लेनदेन हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भुगतान राजस्व 2024 में 1.9 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। इसके 2029 तक 2.4 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है। लेकिन, भविष्य में विकास धीमा रहेगा। 2019 से सालाना 8.8 फीसदी की दर से बढ़ने के बाद राजस्व विस्तार सालाना 4 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है। लेनदेन आधारित राजस्व मजबूत बना हुआ है। रियल टाइम भुगतान अब दुनियाभर में डिजिटल खुदरा भुगतानों का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। 

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छह सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचेगा केंद्र
केंद्र आधा दर्जन सरकारी कंपनियों में अल्पमत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है। विनिवेश सचिव अरुणीश चावला ने कहा, योजना तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने यह नहीं बताया कि किन कंपनियों में हिस्सा बेचने की बात हो रही है। कुछ समय पहले यूको व बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित पांच बैंकों में हिस्सा बेचने की खबर थी। सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों को पूरा करने के लिए एलआईसी में भी हिस्सा बेचना होगा।

खराबी आयकर विभाग के पोर्टल में, पर कंपनियों को देना पड़ेगा जुर्माना
आयकर पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण अग्रिम कर भुगतान अस्वीकार किए जाने से कई कंपनियों पर जुर्माना लग सकता है। कंपनियां केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड व वित्त मंत्रालय से गुहार लगा रही हैं कि उन्हें उन भुगतानों पर जुर्माना न देना पड़े, जो 15 सितंबर या उससे पहले किए गए थे। कुछ कंपनियां सरकार की अनिच्छा होने पर रिट याचिका दायर करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। बड़ी कंपनियों को हर तिमाही के आखिरी महीने की 15 तारीख को अग्रिम कर का भुगतान करना होता है। लेकिन, इस बार आयकर रिटर्न भरने की तारीख भी बढ़ाकर 15 सितंबर तक कर दी गई थी। इससे आम करदाता भी रिटर्न भरने के लिए वेबसाइट पर जा रहे थे। इससे पोर्टल पर बहुत ज्यादा भार पड़ गया। आम करदाताओं के आने से कंपनियों को अग्रिम कर भरने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 

प्रधानमंत्री मोदी 25 सितंबर को करेंगे ‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ 2025 का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को ‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ के चौथे संस्करण का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य घरेलू फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ाना और भारत को वैश्विक स्तर पर फूड इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करना है। यह मेगा इवेंट राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा, जिसमें रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रिशेव विशेष रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान और राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी भाग लेंगे।
चिराग पासवान ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “वर्ल्ड फूड इंडिया सिर्फ एक ट्रेड शो नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जो भारत को फूड इनोवेशन, निवेश और सतत विकास का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

यूपी और गजरात के प्रमुख खरीफ दलहनों और तिलहनों की खरीद को मिली मंजूरी
केंद्र ने उत्तर प्रदेश और गुजरात में प्रमुख खरीफ दलहनों और तिलहनों की खरीद को मंजूरी दी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बैठक में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में लगभग 2.27 लाख टन उड़द (काला चना), 1.13 लाख टन अरहर, 1,983 टन मूंग (हरा चना), 30,410 टन तिल और 99,438 टन मूंगफली की खरीद करने पर सहमति व्यक्त की।

गुजरात में केंद्र ने 47,780 टन उड़द, 4,415 टन मूंग, 1.09 लाख टन सोयाबीन और 12.62 लाख टन मूंगफली खरीदने पर सहमति जताई। मंत्री ने खरीद में पारदर्शिता और अनियमितताओं की रोकथाम पर भी जोर दिया। खरीद एजेंसियों नैफेड और एनसीसीएफ को किसानों का पूर्व-पंजीकरण शुरू करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल पंजीकृत किसान ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपज बेचें। ई-समृद्धि और ई-संयुक्ति पोर्टल पर खरीद प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिससे बैंक खातों में सीधे भुगतान संभव होगा।

H-1B वीजा के नए नियमों से भारत के खिलफ संरक्षणवादी दीवारें ऊंची हो रही
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा फीस को बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दिया है। सिस्टमैटिक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम भारत के खिलाफ संरक्षणवादी दीवारों को और ऊंचा कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प का यह फैसला केवल माल व्यापार घाटे तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह भारत के 190 अरब डॉलर के सेवाओं के निर्यात उद्योग को सीधा खतरा पहुंचा रहा है। रिपोर्ट ने इसे 'H-1B फायरवॉल' करार देते हुए कहा कि यह कदम अमेरिकी संरक्षणवाद को और तेज करेगा और भारतीय IT सेक्टर के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।

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