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Biz Updates: 74% कर्मी सैलरी नहीं लंबे समय के लाभ पर देते हैं जोर, न्यायाधिकरणों के निगरानी तंत्र पर यह अपडेट

Sun, 25 May 2025 03:12 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sun, 25 May 2025 03:12 PM IST
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बिजनेस अपडेट्स - फोटो : amarujala.com

जीवन-यापन की बढ़ती लागत और कार्यबल की बदलती अपेक्षाओं के कारण लोगों की प्राथमिकताएं भी बदली हैं। का खुलासा हुआ है, जिसमें 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे अधिक दीर्घकालिक लाभ के साथ थोड़ा कम वेतन पसंद करते हैं।

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स्टाफिंग समाधान और मानव संसाधन सेवा प्रदाता जीनियस कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि साक्षात्कार में शामिल लगभग 74 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य बीमा, सेवानिवृत्ति योजना और शिक्षा सहायता जैसे मजबूत दीर्घकालिक लाभों के बदले में थोड़ा कम वेतन लेना पसंद करेंगे।
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जीनियस कंसल्टेंट्स की यह रिपोर्ट पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों के 1,139 कर्मचारियों से प्राप्त इनपुट पर आधारित है। इसमें आगे पाया गया कि वर्तमान में केवल 32 प्रतिशत कर्मचारियों को लगता है कि उनका वर्तमान लाभ पैकेज प्रभावी रूप से उनकी वित्तीय भलाई में सहायक है, जबकि 61 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने कहा कि उनके लाभ अपर्याप्त हैं।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि साक्षात्कार में शामिल 54 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने कहा कि उनकी कंपनी कल्याण कार्यक्रमों को लागू करते समय मानसिक और वित्तीय स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देती है। इसमें कहा गया है कि लगभग 84 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पुष्टि की है कि हाइब्रिड या रिमोट व्यवस्था जैसे लचीले कार्य विकल्प उन्हें अपने वित्त को अधिक कुशलतापूर्वक बचाने और प्रबंधित करने में मदद करेंगे।

न्यायाधिकरणों के लिए केंद्रीकृत निगरानी तंत्र स्थापित करें: सीआईआई
उद्योग मंडल सीआईआई ने रविवार को कहा कि न्यायाधिकरणों के लिए एक केंद्रीकृत निगरानी संस्थान की स्थापना से भारत की न्याय वितरण प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार होगा और यह अधिक उत्तरदायी और कुशल बनेगी।


भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि इस कदम से नियामक विश्वसनीयता बढ़ेगी, कारोबार करने में आसानी होगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।

सीआईआई के अनुसार, इस अभ्यास को विधायी समर्थन प्रदान करने के लिए, न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 में उपयुक्त संशोधन पेश किए जा सकते हैं, जो अधिदेश, संरचना, दायरे और जिम्मेदारियों को परिभाषित करेंगे। इसमें सुझाव दिया गया है कि ऐसा केंद्रीय निकाय कार्य निष्पादन निगरानी, डेटा ट्रैकिंग, खोज-सह-चयन समितियों के साथ समन्वय, क्षमता निर्माण और स्वतंत्र शिकायत निवारण जैसे कार्य कर सकता है। उद्योग लॉबी ने तर्क दिया कि वर्तमान में न्यायाधिकरणों का प्रशासनिक नियंत्रण विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में विखंडित है, जिसके कारण मानकीकरण की कमी और कार्यात्मक असंगतियां पैदा हो रही हैं।

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