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Budget 2022: बजट में जीएसटी ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव, वित्त मंत्री कर सकती हैं बड़ा एलान
Sat, 29 Jan 2022 02:40 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Sat, 29 Jan 2022 02:40 PM IST
सार
Budget 2022 May Propose Creating GST Tribunal: देश का बजट पेश होने में महज तीन दिन का समय बाकी रह गया है। इस बार के बजट में जीएसटी ट्रिब्यूनल बनाने का भी प्रस्ताव है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार अनुपालन बोझ को कम करने और व्यापार में आसानी को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के तहत अप्रत्यक्ष कर मुकदमों के शीघ्र समाधान के लिए एक वस्तु और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के निर्माण पर विचार कर रही है।
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बजट 2022
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश का बजट पेश होने में महज तीन दिन का समय बाकी रह गया है। इस बार के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जीएसटी को लेकर बड़ा एलान कर सकती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजट मे जीएसटी ट्रिब्यूनल बनाने का भी प्रस्ताव है। इसमें कहा गया है कि सरकार अनुपालन बोझ को कम करने और व्यापार में आसानी को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के तहत अप्रत्यक्ष कर मुकदमों के शीघ्र समाधान के लिए एक वस्तु और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के निर्माण पर विचार कर रही है, क्योंकि वर्तमान में करदाताओं को उच्च न्यायालयों में याचिका दाखिल करने के लिए विवश होना पडता है, जो महंगा और समय लेने वाला है।
2019 में दी गई थी मंजूरी
हालांकि यह जीएसटी परिषद का विषय है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बजट 2022 में अनुपालन बोझ को कम करने, मुकदमेबाजी को जल्द हल करने और व्यापारियों के जीवन को आसान बनाने पर सरकार ध्यान केंद्रित करेगी और इसीके तहत नए निकाय के लिए एक रोड मैप का एलान कर सकती है। 23 जनवरी 2019 को कैबिनेट ने जीएसटीएटी के निर्माण को मंजूरी दी। कानून के अनुसार, जीएसटीएटी दूसरी अपील का मंच है और केंद्र व राज्यों के बीच विवाद समाधान का पहला आम मंच है।
करदाताओं ने दिया यह तर्क
सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि जीएसटी अधिकारी अक्सर करदाताओं पर निर्धारित कर राशि का भुगतान करने के लिए दबाव डालते हैं, इस संबंध में करदाताओं का तर्क है कि इस तरह के आकलन मनमाने और गलत हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी कानून के अनुसार 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसटीएटी और इसकी क्षेत्रीय बेंच स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी लेकिन कुछ तकनीकी और परिचालन मुद्दे हैं जिन्हें हल किया जा रहा है।
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धारा 109 के तहत गठन का अधिकार
सीजीएसटी अधिनियम की धारा 109 केंद्र को एक अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करने का अधिकार देती है। यह धारा सरकार को शक्ति प्रदान करती है कि वह परिषद की सिफारिश पर अधिसूचना जारी करेगा और सिफारिश में विनिर्दिष्ट तारीख से प्रभावी बनाते हुए वस्तु एवं सेवा कर अपील के रूप में पारित किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करेगा। सार्वजनिक मंच होने के कारण जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि जीएसटी के अंतर्गत उत्पन्न विवादों के समाधान में एकरूपता आए और इस प्रकार समूचे देश में जीएसटी को समान रूप से कार्यान्वित किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था यह आदेश
इस संबंध में अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में सरकार से अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित करने को कहा था। याचिका में कहा गया था कि पीड़ित करदाता ट्रिब्यूनल की अनुपस्थिति में उच्च न्यायालयों में रिट याचिका दायर करने के लिए विवश हैं, जो न केवल महंगा है बल्कि इन मामलो के बढने से अदालतों पर भी बोझ बढ रहा है।
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2019 में दी गई थी मंजूरी
हालांकि यह जीएसटी परिषद का विषय है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बजट 2022 में अनुपालन बोझ को कम करने, मुकदमेबाजी को जल्द हल करने और व्यापारियों के जीवन को आसान बनाने पर सरकार ध्यान केंद्रित करेगी और इसीके तहत नए निकाय के लिए एक रोड मैप का एलान कर सकती है। 23 जनवरी 2019 को कैबिनेट ने जीएसटीएटी के निर्माण को मंजूरी दी। कानून के अनुसार, जीएसटीएटी दूसरी अपील का मंच है और केंद्र व राज्यों के बीच विवाद समाधान का पहला आम मंच है।
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करदाताओं ने दिया यह तर्क
सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि जीएसटी अधिकारी अक्सर करदाताओं पर निर्धारित कर राशि का भुगतान करने के लिए दबाव डालते हैं, इस संबंध में करदाताओं का तर्क है कि इस तरह के आकलन मनमाने और गलत हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी कानून के अनुसार 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसटीएटी और इसकी क्षेत्रीय बेंच स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी लेकिन कुछ तकनीकी और परिचालन मुद्दे हैं जिन्हें हल किया जा रहा है।
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धारा 109 के तहत गठन का अधिकार
सीजीएसटी अधिनियम की धारा 109 केंद्र को एक अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करने का अधिकार देती है। यह धारा सरकार को शक्ति प्रदान करती है कि वह परिषद की सिफारिश पर अधिसूचना जारी करेगा और सिफारिश में विनिर्दिष्ट तारीख से प्रभावी बनाते हुए वस्तु एवं सेवा कर अपील के रूप में पारित किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करेगा। सार्वजनिक मंच होने के कारण जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि जीएसटी के अंतर्गत उत्पन्न विवादों के समाधान में एकरूपता आए और इस प्रकार समूचे देश में जीएसटी को समान रूप से कार्यान्वित किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था यह आदेश
इस संबंध में अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में सरकार से अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित करने को कहा था। याचिका में कहा गया था कि पीड़ित करदाता ट्रिब्यूनल की अनुपस्थिति में उच्च न्यायालयों में रिट याचिका दायर करने के लिए विवश हैं, जो न केवल महंगा है बल्कि इन मामलो के बढने से अदालतों पर भी बोझ बढ रहा है।