Budget 2024: 'जीएसटी ने बंटी हुई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाया', वित्त मंत्री ने बजट में गिनाए लाभ
Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2024 में जीएसटी जुड़ा कोई बड़ा एलान नहीं किया है। हालांकि उन्होंने अपनी बजट स्पीच में जीएसटी के महत्व के बारे में चर्चा जरूर की। आइए जानते हैं अंतरिम बजट 2024 में माल व सेवा कर (जीएसटी) पर वित्त मंत्री ने क्या कहा?
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2024 में जीएसटी जुड़ा कोई बड़ा एलान नहीं किया है। हालांकि उन्होंने अपनी बजट स्पीच में जीएसटी के महत्व के बारे में जरूर चर्चा की। उन्होंने कहा जीएसटी से पहले भारत में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था पूरी तरह बंटी हुई थी। जीएसटी ने इसे एकीकृत करके व्यापार और उद्योग पर अनुपालन के बोझ को कम कर दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि उद्योग जगत ने जीएसटी के लाभ को स्वीकार किया है।
जीएसटी लागू होने से आपूर्ति शृंखला में हुआ सुधार
वित्त मंत्री ने कहा, "एक अग्रणी परामर्शदाता फर्म की ओर से हाल ही में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 94 प्रतिशत उद्योग प्रमुख जीएसटी में हुए बदलाव को व्यापक रूप से सकारात्मक मानते हैं। सर्वेक्षण में प्रश्नों के उत्तर देने वाले 80 प्रतिशत प्रतिभागियों के अनुसार इससे आपूर्ति शृंखला में सुधार हुआ है। टैक्स आर्बिटराज और ऑक्ट्रोइ के हटने के परिणामस्वरूप राज्यों और शहरों की सीमाओं से चैक पोस्ट हट गए हैं।"
जीएसटी का कर आधार दोगुने से अधिक हो गया
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान बताया कि जीएसटी का कर आधार बढ़कर दोगुने से अधिक हो गया है। इस वर्ष औसत मासिक सकल जीएसटी संग्रहण बढ़कर लगभग दोगुना, यानी 1.66 लाख करोड़ रूपये हो गया है। इससे राज्य भी लाभान्वित हुए हैं। राज्यों को जारी किए गए कंपेन्सेशन सहित राज्यों के एसजीएसटी राजस्व की बोयन्सी 2017-18 से 2022-23 तक जीएसटी के बाद वाली अवधि में 1.22 रही है। इसके विपरीत वर्ष 2012-13 से 2015-16 की जीएसटी से पूर्व की चार वर्षों की अवधि में विलय होने वाले राज्य राजस्व की टैक्स बोयन्सी केवल 0.72 थी। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके सबसे बड़े लाभार्थी उपभोक्ता हैं। जीएसटी से जुड़ी लागतों और करों में कमी के परिणामस्वरूप अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम हुई हैं।
वित्त मंत्री बोलीं- अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए उपाय हुए
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि हमने अंतराष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए सीमा शुल्क में अनेक उपाय किए हैं, जिनके परिणामस्वरूप वर्ष 2019 में जब पहली बार नेशनल टाइम रिलीज अध्ययन शुरू हुए तब से चार वर्षों की अवधि में इनलैंड कंटेनर डिपो में आयात निर्गम समयावधि 47 प्रतिशत कम होकर 71 घंटे रह गई है, एयर कार्गो परिसरों में 28 प्रतिशत कम होकर 44 घंटे तथा बंदरगाहों में 27 प्रतिशत कम होकर 85 घंटे रह गई है।
पिछले बजट में जीएसटी के मामले में नहीं मिली थी कोई बड़ी राहत
इससे पहले केंद्रीय बजट 2023-24 में व्यापारियों को जीएसटी के मामले में कोई बड़ी राहत नहीं मिली थी। जिसपर व्यापारियों ने निराशा जताई थी। देश के खुदरा छोटे व्यापारियों की लंबे समय से मांग थी कि उन्हें बहुराष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन बाजार के नकारात्मक असर से बचाने के लिए उचित नीतियां बनाई जाएं। लेकिन केंद्र सरकार ने ऑनलाईन बाजार को नियंत्रित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी। जिससे छोटे व्यापारियों में बजट को लेकर निराशा देखने को मिली थी। हालांकि पिछले बजट में सरकार ने टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी कर आम उपभोक्ताओं की जेब में ज्यादा पैसा छोड़कर मांग में बढ़ोतरी का रास्ता बनाने की कोशिश की थी जिसे व्यापारियों ने सकारात्मक कदम बताया था।
केद्र ने जीएसटी लागू होने से टैक्स अदायगी सुगम होने का किया था दावा
केंद्र सरकार ने दावा किया था कि देश में कई टैक्स दरों को हटाकर एक स्तरीय जीएसटी (GST) सिस्टम लागू करने से टैक्स अदायगी में लोगों को राहत मिलेगी। इससे व्यापारियों को कई स्तरों पर अलग-अलग टैक्स भरने की परेशानी से भी बचाया जा सकेगा। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यह नया सिस्टम उनके लिए ज्यादा परेशानी देने वाला साबित हुआ है। व्यापार जगत इस सिस्टम में बदलाव की मांग कर रहा था। लेकिन पिछले बजट में सरकार ने व्यापारियों को इससे कोई राहत नहीं दी थी।