बजट 2021: MSME सेक्टर को इस बार के बजट से हैं कई उम्मीदें, ये खास तोहफा दे सकती है मोदी सरकार
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केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद भवन में बजट 2021 पेश करेंगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 90 के दशक के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा चुनौती पूर्ण बजट होगा। सरकार का खजाना खाली है। इस बजट में एमएसएमएई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) सेक्टर को राहत मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों की मानें तो बजट 2021 में एमएसएमई को जीएसटी में राहत मिलनी चाहिए। कोरोना के कारण पिछले साल एमएसएमई सेक्टर काफी प्रभावित हुआ। इसी को देखते हुए सरकार ने आत्मनिर्भर राहत पैकेज के तहत एमएसएमई सेक्टर को कई बेनेफिट दिए थे।
इसके अलावा जानकारों का मानना है कि कारोबार ग्रोथ को बढ़ाने और एमएसएमई के प्रोत्साहन के लिए व्यावसायिक सेवाओं पर जीएसटी दर 5 फीसदी तक घटाया जाना चाहिए, जो इस समय 18 फीसदी है। वहीं, इस समय जिन सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है उनमें कानूनी पेशेवरों, कोरियर सर्विसेज और मैनेजमेंट कंसल्टिंग के अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, आर्किटेक्ट्स, एचआर, मार्केटिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट तथा होस्टिंग शामिल हैं। इसके अलावा आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोविजनिंग, मेंटेनेंस, रिपेयर और इंस्टॉलेशन सर्विसेज भी इसी लिस्ट में शामिल हैं।
साथ ही जीएसटी के अलावा एमएसएमई सेक्टर के लिए एक और खास प्रोविजन का ऐलान किया जा सकता है। माना जा रहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही इसके लिए संकेत दे चुकी हैं। दरअसल, सरकार ने कोरोना के मद्देनजर एमएसएमई को कई बेनेफिट दिए। इस बीच बजट में और प्रावधान किए जाने की भी संभावना है।
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बजट में केंद्र सरकार एमएसएमई को एनपीए से जुड़े नियमों में भी राहत दे सकती है। एनपीए क्लासीफिकेशन पीरियड को एमएसएमई के लिए 90 दिन से 120 या 180 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। सरकार कोरोना महामारी से प्रभावित होने के चलते इस सेक्टर को ये राहत दे सकती है।
'भारत के निर्यात और अर्थव्यवस्था में आईटी उद्योग और क्षेत्र, एक प्रमुख हिस्सा रहे हैं। कोविड-19 महामारी जैसे कठिन समय के दौरान, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, देश की अर्थव्यवस्था के लिए, बड़े पैमाने पर लोगों को घर से काम करने और दूरस्थ रूप से अपने काम को अंजाम देने के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है। ज्यादातर लोग ऐसे बदलाव के लिए सक्षम नही होते क्योंकि भारत में ज्यादातर लोगो के पास संसाधनों की कमी है। लेकिन अब, जब सस्ती तकनीक की उपलब्धता है, तो सरकार को एक मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए संशोधन करना चाहिए कि हर घर इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बने। जिस तेजी से दुनिया डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रही है, तकनीक की कमी वाले लोगों को पीछे छोड़ दिया जाएगा। जीएसटी को कम करने और टेक्नोलॉजी की पहुंच को बढ़ाने से कॉरपोरेट कंपनियों को मदद मिलेगी और देश में आविष्कारों की संख्या बढ़ेगी जो देश में तकनीकी विकास और प्रगति को आगे बढ़ाएंगे।'
- श्री पंकज यादव, संस्थापक, ट्रूटेक सर्विसेस
'वर्ष 2020 लगभग हर क्षेत्र के लिए चुनौतियां वाला वर्ष रहा, इसलिए हम बजट 2021 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र सरकार द्वारा बजट में संपूर्ण आर्थिक वृद्धि पर ध्यान दिए जाने और भारत को दुनिया का व्यावसायिक केंद्र बनाने के उपायों की उम्मीद कर रहा है। हमें उम्मीद है कि नई नीतियों के तहत महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाकर, सभी क्षेत्रों में मेक इन इंडिया की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए नए और नीतिगत कदम उठाकर आरएंडडी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसमें कोई आशंका नहीं है कि डिजिटल इनोवेशन भारत के आगामी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इस तरह से, नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना, प्रतिभाओं की गुणवत्ता सुधारना और एमएसएमई को सक्षम बनाना सरकार के लिए मुख्य एजेंडा होना चाहिए।'
- मंदीप अरोड़ा, प्रबंध निदेशक, UBON
'वित्त मंत्रालय आकलन वर्ष 2021-22 के लिए एक फरवरी को बजट पेष करेगा और कॉरपोरेट, व्यक्ति, करदाता और पेशेवरों, सभी को इस बजट से उम्मीदें हैं। अर्थव्यवस्था और विकास में मंदी को देखते हुए, भारतीय वैल्यू चेन का अहम हिस्सा समझे जाने वाले एमएसएमई उद्योग बजट से बड़ी राहत और सुधारों की उम्मीद कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि यह बजट एमएसएमई सेक्टर को सशक्त बनाने से लेकर अर्थव्यवस्था को मौजूदा मंदी से उबारने के लिए ठोस प्रयास करेगा। जीएसटी को तर्कसंगत बनाए जाने के अलावा, हमें आगामी बजट से ऋण सुविधाओं के विस्तार की भी उम्मीद है, क्योंकि सरकार को बाजारों में तरलता बढ़ाने और मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने के लिए नकदी लगाने पर जोर देना चाहिए।'
- विनय जैन, फाउंडर एवं सीईओ, Grafdoer