वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूसरे आम बजट पर करदाताओं की नजरें, आयकर पर राहत की उम्मीद
- अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती बन सकती है फैसले के बीच बाधा।
- करदाताओं की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूसरे आम बजट पर लगी हैं।
- आयकर स्लैब में बदलाव के लिए सरकार ने बनाई थी डीटीसी पर टास्कफोर्स।
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आयकर में और राहत पाने के लिए आम करदाताओं की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूसरे आम बजट पर लगी हैं। सरकार ने भी आयकर स्लैब में बदलाव के लिए डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) पर टास्कफोर्स बनाई थी, जो अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। ऐसे में 1 फरवरी को आने वाले बजट को लेकर करदाताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
वित्त मंत्री के लिए यह कदम उठाना आसान नहीं
दूसरी ओर, आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर छाई सुस्ती और कंपनी कर में कटौती से राजस्व को हुए नुकसान के कारण वित्त मंत्री के लिए यह कदम उठाना आसान नहीं होगा। सीतारमण ने 2019 में कंपनी कर में करीब 10 फीसदी की बड़ी कटौती कर दी थी, जिससे सरकारी खजाने को 1.45 लाख करोड़ की चपत लगने का अनुमान है। बावजूद इसके वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था में खपत को बढ़ाने के लिए आम आदमी को आयकर में राहत दे सकती हैं। पिछले दिनों अर्थशास्त्रियों के साथ बजट पूर्व चर्चा में भी वित्त मंत्री को डीटीसी लागू करने का सुझाव दिया गया था। वित्त मंत्री ने भी संकेत दिए थे कि आयकर स्लैब को और तर्कसंगत बनाने के लिए उपायों पर विचार किया जा रहा है।
डीटीसी लागू हुआ तो बड़ी राहत
कर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वित्त मंत्री बजट में डीटीसी लागू करने का एलान करती हैं, तो पर्सनल टैक्सपेयर के लिए बड़ी राहत हो सकती है। इसमें कर स्लैब में बदलाव करते हुए 10 लाख रुपये तक की सालाना आय पर 10 फीसदी टैक्स लगाने की सिफारिश है, जो अभी 5 लाख से 10 लाख की सालाना आय पर 20 फीसदी लगता है। इसके अलावा 10 से 20 लाख की सालाना आया वालों पर आयकर सीमा 20 फीसदी रह सकती है। इस कदम से आम आदमी की बचत बढ़ेगी जिसका लाभ अर्थव्यवस्था को मिलेगा।