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Economic Survey 2020: थालीनॉमिक्स और 2030 तक आठ करोड़ नौकरियां देने पर जोर

Fri, 31 Jan 2020 02:56 PM IST
paliwal पालीवाल बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 31 Jan 2020 02:56 PM IST
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budget 2020 finance minister nirmala sitharaman tables economic survey for 2020-21
- फोटो : ANI
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण को लोकसभा में पेश कर दिया है। आर्थिक सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि अगले वित्त वर्ष में विकास दर छह से 6.5 फीसदी के बीच रह सकती है। समीक्षा में कहा गया कि वित्तीय मोर्चे पर अगले साल भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोकसभा के बाद ही इसको राज्यसभा में पेश किया गया। 2025 तक अच्छी तनख्वाह वाली 4 करोड़ और 2030 तक 8 करोड़ नौकरियां दी जा सकती हैं। इससे 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के लक्ष्य तक तेजी से बढ़ना भी संभव होगा।
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इसलिए पेश किया जाता है आर्थिक सर्वे

आर्थिक सर्वे इसलिए पेश किया जाता है ताकि इससे यह पता चल सकें, कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था किस हाल में रही है और आने वाले वित्त वर्ष में इसको कैसे और बेहतर बनाया जा सकता है। बजट को तैयार करने में इस सर्वे की दिए गए सुझावों पर अमल करने के  लिए सरकार जरूरी उपायों की घोषणा करती है। 
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थालीनॉमिक्स पर जोर

इस बार के आर्थिक सर्वे में थालीनॉमिक्स पर जोर दिया गया है। थालीनॉमिक्स में यह बताया गया है कि एक व्यक्ति की थाली में सही से खाद्यान पहुंच रहा है या फिर नहीं। सर्वे में कहा गया है कि इस वित्त वर्ष में थालीनॉमिक्स में 29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से हर साल 10, 887 रुपये की बचत प्रत्येक परिवार को हुई है।  
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पेश हैं आर्थिक सर्वे की खास बातें...

  • चालू वित्त वर्ष में कर संग्रह में कमी हो सकती है। 
  • जीएसटी से सरकार को संग्रह बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसके बारे में किसी तरह की स्पष्टता नहीं है। 
  • आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर पांच फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी। 
  • विश्व में भारत प्रमुख देशों में गिना जाने लगा है। 
  • मांग बढ़ाने के लिए कई सारे उपाय सरकार को करने होंगे, ताकि सुस्ती से निकला जा सके। 
  • सर्वे में कहा गया है कि ग्रोथ को बढ़ाने के लिए कई नियमों में ढील देने पड़ेगी। 
  • ग्लोबल ग्रोथ में कमजोरी से भारत भी प्रभावित हो रहा है।
  • फाइनेंशियल सेक्टर की दिक्कतों के चलते निवेश में कमी की वजह से भी चालू वित्त वर्ष में ग्रोथ घटी।
  • किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने का लक्ष्य। 
  • छोटे उद्योगों के लिए लोन और अन्य सुविधाएं देगी सरकार। 
  • 2014-15 से 2018-19 के बीच सड़क और राजमार्गों में निवेश तीन गुणा बढ़ गया है। 
  • देश में 95 फीसदी व्यापार समुद्र के रास्ते हो रहा है। 
  • आईएलएंडएफएस से देश के एनबीएफसी सेक्टर में चिंता का माहौल देखने को मिला। 
  • इस संकट से निपटने के लिए सर्वे में एक हेल्थ स्कोर तैयार किया गया है, जिसकी मदद से आने वाले समय में पहले से अलर्ट भेजा सकता है। 
  • इससे एनबीएफसी कंपनियों में डिफॉल्ट होने पर निवेशक और बैंक पहले से किसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हो सकेंगे। 
  • 2011-12 से 2017-18 के बीच 2.62 करोड़ लोगों को नई नौकरियां मिली हैं। 
  • भारतीय रेलवे ने विश्व में सबसे ज्यादा यात्रियों को ले जाने का रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान 120 करोड़ टन फ्रेट और 840 करोड़ यात्रीयों ने यात्रा की है।
  • विकास दर को बढ़ाने के लिए मैन्युफेक्चरिंग पर ध्यान देने के लिए कहा गया है। 
  • इसमें चीन की तर्ज पर भारत में असेंबल करके नौकरियां बढ़ाई जा सकती हैं। 
  • बंदरगाह पर लीलफीताशाही को खत्म करके निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया है। 
  • इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने के लिए कई तरह के नियमों में ढील देने की बात कही गई है। 
  • सर्वे में सरकारी बैंकों की कार्यकुशलता बढ़ाने की भी बात की गई है।  



छह महीने में मुख्य आर्थिक सलाहकार ने तैयार किया आर्थिक सर्वेक्षण

इस आर्थिक सर्वेक्षण को मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन की टीम ने मात्र छह माह में तैयार किया है। आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि बीते साल में आर्थिक मोर्चे पर देश का क्या हाल रहा। आर्थिक सर्वे के जरिए मुख्य आर्थिक सलाहकार सरकार को सुझाव भी देते हैं, ताकि इकोनॉमी के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। 

लैवेंडर रंग के कागज पर छपा है आर्थिक सर्वे

इस बार पेश किया गया आर्थिक सर्वे लैवेंडर रंग के कागज पर छापा गया है। यह वो ही रंग है, जिस पर अब सौ रुपये का नया नोट छप रहा है। 
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