बजट 2020: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने पर हो विचार, मनरेगा में बढ़े मजदूरी
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एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट में सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए अहम घोषणाएं करनी चाहिए। फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ राजीव यादव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा है कि सरकार को पीएम-किसान और मनरेगा जैसी योजनाओं में ग्रामीणों को मिलने वाली किश्त एवं मजदूरी में बढ़ोतरी होनी चाहिए।
खराब दौर से गुजर रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था
फिलहाल ग्रामीण अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में मंदी के दौर से गुजर रही है। राजीव ने कहा कि ऐसे में सरकार को खेती और इससे संबंधित उद्योग, मकान और कस्बों में स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाने होंगे। किसानों की आय को कैसे बढ़ाना है, उसके बारे में भी इस बार के बजट में सोचना होगा। अगर लोगों के पास आमदनी का जरिया बढ़ेगा, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, जिसका फायदा पूरी तरह से देश की जीडीपी पर देखने को मिलेगा। इसके लिए सरकार स्मॉल फाइनेंस बैंक की मदद भी ले सकती हैं, क्योंकि इनकी पहुंच ग्रामीण इलाकों में अन्य बैंकों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
मध्यम वर्ग को मिले आयकर में राहत
इसके साथ ही यादव ने कहा कि आयकर में मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए एलान होना चाहिए। इसके अलावा राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए विनिवेश बढ़ाना चाहिए। बैंकों का एनपीए कम करने के साथ ही सरकार को डिजिटाइजेशन, ई-केवाईसी और ई-सिग्नेचर को बढ़ावा देने के लिए घोषणाएं करनी चाहिए। इसके साथ ही एफडी के रिटर्न पर लगने वाले कर को डेट म्यूचुअल फंड पर भी लगाना चाहिए ताकि इसका फायदा आम भारतीयों को मिल सके। सरकार अगर बैंकों की मदद करेगी तो फिर यह एक बहुत अच्छा कदम होगा।
एनबीएफसी कंपनियों को मिलना चाहिए आधार बेस्ड ईकेवाईसी का लाभ
वहीं टाटा कैपिटल के एमडी व सीईओ राजीव सब्बरवाल ने सरकार से मांग की कि वो इस बार के बजट में एनबीएफसी कंपनियों को भी आधार बेस्ड ईकेवाईसी सुविधा का लाभ दे ताकि वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी तरह से डिजिटल हो जाए। बड़ी कंपनियों को पब्लिक द्वारा जमा की गई रकम को एक्सेस करने की मंजूरी मिले। इससे क्रेडिट सेक्टर में ग्रोथ देखने को मिलेगी। आरबीआई को एनबीएफसी कंपनियों के साथ हमेशा सलाह-मशविरा करना चाहिए ताकि दोनों को लगातार फीडबैक मिलता रहे। इससे कंपनियां समय रहते फैसले ले सकेंगी।