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बजट 2019: आगामी पांच सालों में इन दो मुद्दों पर रहेगा निर्मला सीतारमण का फोकस

Mon, 24 Jun 2019 01:50 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Mon, 24 Jun 2019 01:50 PM IST
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Budget 2019 Nirmala Sitharaman likely to focus on two key issues for next five years
निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई

पांच जुलाई को पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उनका लक्ष्य बेरोजगारी को खत्म करना होगा और ग्रामीण इलाकों के विकास पर उनका ध्यान केंद्रित रहेगा। 

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ये होगा निर्मला सीतारमण का लक्ष्य 

ऐसा माना जा रहा है कि अगले पांच सालों के लिए निर्मला सीतारमण का लक्ष्य देश से बेरोजगारी को खत्म करना और अर्थिक विकास करना होगा। 

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इस मामले पर एक अधिकारी का कहना है कि रोजगार को बढ़ावा देने के लिए आगामी बजट में महत्वपूर्ण घोषणा की जा सकती है और निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त खपत को बढ़ावा देने के लिए सरकार बैंकों को, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। 
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सुधारों के लिए मंच तय करेगा बजट

इस मामले से अवगत अधिकारियों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पहला बजट अगले पांच वर्षों में सुधारों के लिए मंच तय करेगा, जो भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन की पेशकश का बुनियादी ढांचा होगा।

रेपो रेट में हो सकती है कटैती

छह जून को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम लोगों के लिए बड़ी घोषणा की थी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार रेपो रेट को छह फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया गया था। नौ सालों में पहली बार म इतना कम हुआ है। अब ऐसा माना जा रहा है कि आगे भी आरबीआई द्वारा इस दर में और कटौती हो सकती है। 

ग्रामीण भारत पर होगा सरकार का ध्यान

अधिकारियों का कहना है कि सरकार का ध्यान ग्रामीण भारत पर रहेगा। पांच जुलाई को पेश होने वाले बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और रोजगार के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। 

5.8 फीसदी थी देश की विकास दर

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च के बीच देश की विकास दर 5.8 फीसदी रही थी। यह पिछले वित्त वर्ष की तीन तिमाही के मुकाबले भी काफी कम है। इससे पहले की तीन तिमाही में विकास दर का आंकड़ा क्रमश:  8.2 फीसदी, 7.1 फीसदी और 6.6 फीसदी रहा था। अगर चार तिमाही का औसत निकाला जाए तो फिर पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 6.8 फीसदी रही है। 

45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची बेरोजगारी 

देश में बढ़ती बेरोजगारी पर भी सरकार का ध्यान रहेगा। रोजगार के मोर्चे पर लोकसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद सरकार ने समय-समय पर लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) – वार्षिक रिपोर्ट (जुलाई 2017-जून 2018) जारी किया, जिसमें बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी थी, जो 45 वर्षों में सबसे अधिक थी। 

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