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Gujarat: 'ऑनलाइन फ्रॉड मामले में बैंक को ग्राहक का पैसा लौटाना होगा', उपभोक्ता अदालत ने एसबीआई को दिए निर्देश
Thu, 26 Oct 2023 02:31 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 26 Oct 2023 02:31 PM IST
सार
Gujarat: सुहागिया के वकील ने तर्क दिया कि बैंक ने धन को फिर से प्राप्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि उसे पता था कि इसे आईसीआईसीआई बैंक के खाते में स्थानांतरित किया गया था। दूसरी ओर, बैंक ने दावा किया कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही के कारण हुई और उसने बैंकिंग दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम किया था।
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ऑनलाइन फ्रॉड
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
गुजरात की एक उपभोक्ता अदालत ने साइबर फ्रॉड के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सूरत में नवसारी उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (सीडीआरसी) ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को यूपीआई साइबर धोखाधड़ी के शिकार व्यक्ति को 39,578 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आयोग ने त्वरित कार्रवाई नहीं करने के लिए बैंक की आलोचना की और कहा कि ऐसे मामलों में ग्राहकों को तुरंत सतर्क करना बैंक की जिम्मेदारी है।
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पीड़ित विधि सुहागिया ने साइबर धोखाधड़ी के कारण 22 दिसंबर, 2021 को एसबीआई की फुवारा शाखा में अपने खाते से 59,078 रुपये खो दिए। उसने तुरंत बैंक को घटना की सूचना दी और साइबर अपराध हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस फेडरल बैंक के खाते में जमा 19,500 रुपये फ्रीज करने में कामयाब रही, जिसे बाद में अदालत के आदेश के बाद सुहागिया के खाते में वापस स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, बैंक शेष 39,578 रुपये की वसूली के लिए त्वरित कार्रवाई करने में विफल रहा, जिसके कारण सुहागिया ने 14 दिसंबर, 2022 को एसबीआई को कानूनी नोटिस भेजा। बैंक से कोई जवाब नहीं मिलने पर उसने मदद के लिए उपभोक्ता आयोग से संपर्क किया।
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सुहागिया के वकील ने तर्क दिया कि बैंक ने धन को फिर से प्राप्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि उसे पता था कि इसे आईसीआईसीआई बैंक के खाते में स्थानांतरित किया गया था। दूसरी ओर, बैंक ने दावा किया कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही के कारण हुई और उसने बैंकिंग दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम किया था।
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बैंक ने यह भी कहा कि उसने यूपीआई प्राधिकरण से संपर्क किया था, जिसने पुष्टि की कि पैसा आईसीआईसीआई बैंक में जमा किया गया था और राशि को फ्रीज करने के उपाय किए। हालांकि, सीडीआरसी ने बैंक के तर्क को खारिज कर दिया, उसके अनुसार शिकायतकर्ता ने धोखाधड़ी के बारे में तुरंत बैंक को सूचित किया था, लेकिन यह साबित करने का कोई सबूत नहीं है कि बैंक ने कोई कार्रवाई की थी।
आयोग ने जोर देकर कहा कि बैंकों के पास उन खातों के बारे में ऑनलाइन विवरण तक पहुंच है जहां पैसा जमा किया गया है वे अन्य बैंकों को भुगतान रोकने या राशि को फ्रीज करने के लिए सूचित कर सकते हैं। इस मामले में, बैंक के ऐसा करने में विफलता के परिणामस्वरूप शिकायतकर्ता को वित्तीय नुकसान हुआ। सीडीआरसी ने निष्कर्ष निकाला कि बैंक की त्वरित कार्रवाई की कमी और सेवा में लापरवाही ग्राहक को हुए वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार थी।