फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Bank can't open LOC as arm-twisting tactic to recover debt: Delhi HC

Delhi High Court: 'ऋण वसूली के लिए बैंक लुकआउट सर्कुलर नहीं जारी कर सकते', दिल्ली हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

Wed, 12 Jun 2024 07:41 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 12 Jun 2024 07:41 PM IST
सार

Delhi High Court: अदालत ने कर्ज चुकाने में विफल रहने वाली कंपनी के पूर्व निदेशक के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को रद्द कर दिया और इस बात पर जोर दिया कि विदेश यात्रा की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए एलओसी एक बड़ी बाधा है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि किसी भी व्यक्ति को बहुत ही बाध्यकारी कारणों को छोड़कर विदेश जाने के उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।

विज्ञापन
Bank can't open LOC as arm-twisting tactic to recover debt: Delhi HC
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बैंक कर्ज वसूली से जुड़े एक मामले में बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि बैंक कर्ज वसूली के लिए बैंक लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) नहीं जारी कर सकते जब तक कि धोखाधड़ी या धन की हेराफेरी का कोई आरोप न हो।

विज्ञापन


अदालत ने कर्ज चुकाने में विफल रहने वाली कंपनी के पूर्व निदेशक के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को रद्द कर दिया और इस बात पर जोर दिया कि विदेश यात्रा की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए एलओसी एक बड़ी बाधा है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि किसी भी व्यक्ति को बहुत ही बाध्यकारी कारणों को छोड़कर विदेश जाने के उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने 28 मई को पारित एक फैसले में ये बातें कही। अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही लंबित नहीं है और न ही उन पर कोई आरोप है कि उसने गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि बैंक ने याचिकाकर्ता के साथ-साथ उनकी कंपनी के खिलाफ वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्गठन और प्रतिभूति हित प्रवर्तन (एसएआरएफएईएसआई) कानून और दिवाला व ऋण शोधन अक्षमता संहिता जैसे विभिन्न कानूनों के तहत पहले ही कदम उठा दिए हैं। याचिकाकर्ता जो कंपनी के निदेशकों में से एक था ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए 69 करोड़ रुपये के क्रेडिट की गारंटी दी थी। बाद में उन्होंने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और एक अन्य इकाई में शामिल हो गए। कंपनी द्वारा कर्ज नहीं चुका पाने के बाद बैंक ने विभिन्न कानूनों के तहत उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की और याचिकाकर्ता के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने का अनुरोध किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि हालांकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा के अधिकार की गारंटी है और इसे मनमाने और अवैध तरीके से नहीं छीना जा सकता है। अदालत ने कहा, "लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां बैंक बिना किसी आपराधिक कार्यवाही के केवल धन की वसूली के उपाय के रूप में लुक आउट सर्कुलर जारी करने पर जोर दे रहे हैं।"  अदालत ने कहा कि बैंक ऋण चूक के प्रत्येक मामले में एलओसी का सहारा नहीं लिया जा सकता क्योंकि नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने आदेश दिया, "उपरोक्त बातों के मद्देनजर, याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) को रद्द किया जाता है।"

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed